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सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
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राजमार्गों का रूपांतरण: भारत की विकसित भारत की यात्रा को सशक्त बनाना

प्रविष्टि तिथि: 14 JUN 2026 2:45PM by PIB Delhi

पिछले बारह वर्षों में, भारत के सड़क अवसंरचना परिदृश्य में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में संपर्क के एक नए युग की शुरूआत की है। ससे आर्थिक विकास को मजबूती मिली है, रसद दक्षता में सुधार हुआ है और लाखों नागरिकों के लिए यात्रा सुगम हुई है।

सरकार ने विश्व स्तरीय अवसंरचना को राष्ट्रीय विकास के लिए महत्‍वपूर्ण मानते हुए, संपर्क बढ़ाने, यात्रा का समय कम करने, सड़क सुरक्षा में सुधार लाने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से परिवर्तनकारी पहल की हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का तीव्र विस्तार, रिकॉर्ड गति से निर्माण और प्रतिष्ठित एक्सप्रेसवे के विकास सब ने भारत के परिवहन तंत्र को नया रूप दिया है और एक आधुनिक और आत्मनिर्भर राष्ट्र की नींव को मजबूत किया है।

भारतमाला परियोजना: एकीकृत राष्ट्रीय संपर्क की परिकल्‍पना

राजमार्ग क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी पहलों में से एक भारतमाला परियोजना है। यह देश भर में माल और यात्री आवागमन को सुगम बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया एक प्रमुख कार्यक्रम है। भारत सरकार द्वारा अक्टूबर 2017 में अनुमोदित इस कार्यक्रम में 5.35 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय से 34,800 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारों के विकास की परिकल्पना की गई है।

यह कार्यक्रम आर्थिक गलियारों, अंतर-गलियारों और फीडर मार्गों, राष्ट्रीय गलियारा दक्षता सुधार परियोजनाओं, सीमा सड़कों, तटीय सड़कों, बंदरगाह संपर्क सड़कों और एक्सप्रेसवे के विकास के लिए बनाया गया है। मार्च 2026 तक, 26,425 किलोमीटर की परियोजनाओं के लिए ठेके दिए जा चुके हैं, जबकि 22,590 किलोमीटर का निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है। भारतमाला परियोजना ने संपर्क को काफी मजबूत किया है, रसद लागत को कम किया है और दूरस्थ तथा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुंच में सुधार किया है ससे आर्थिक विकास, क्षेत्रीय संतुलन और राष्ट्रीय एकता में योगदान मिला है।

राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का विस्तार

भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का विस्तार पिछले दशक की सबसे महत्वपूर्ण अवसंरचनात्मक उपलब्धियों में से एक रहा है। यह नेटवर्क 2014 में लगभग 91,287 किलोमीटर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 1,46,572 किलोमीटर से अधिक हो गया है जो लगभग 61 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

इस उल्लेखनीय वृद्धि ने राज्यों और क्षेत्रों के बीच संपर्क को बेहतर बनाया है, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही को तेज किया है, बाजारों तक पहुंच को बढ़ाया है और देश की आर्थिक स्‍थिति को मजबूत किया है। यह नेटवर्क दूरस्थ और कम विकसित क्षेत्रों को विकास केंद्रों और आर्थिक केंद्रों से जोड़कर क्षेत्रीय असमानताओं को दूर कर रहा है।

राजमार्ग निर्माण में रिकॉर्ड वृद्धि

भारत ने राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की गति में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। यह 2013-14 में लगभग 11.6 किलोमीटर प्रति दिन की औसत निर्माण दर से बढ़कर 2025 में लगभग 34 किलोमीटर प्रति दिन हो गई है।

यह उपलब्धि निरंतर नीतिगत समर्थन, बेहतर परियोजना क्रियान्वयन, सुव्यवस्थित अनुमोदन तंत्र, तकनीकी नवाचार और बढ़ी हुई संस्थागत क्षमता को दर्शाती है। निर्माण की तीव्र गति ने महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं को शीघ्रता से पूरा किया है और राष्ट्रव्यापी संपर्क को मजबूत बनाया है।

इसके अतिरिक्त, भारतीय प्रबंधन संस्‍थान, बैंगलोर (आईआईएमबी) द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास ने कारखानों तक पहुंच में सुधार करके औसत रसद लागत को काफी कम कर दिया है जिसके परिणामस्वरूप कारखाने और आपूर्तिकर्ता के बीच और कारखाने और ग्राहक के बीच परिवहन लागत में कमी आई है।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे: लंबी दूरी के संपर्क का नया रूप

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे भारत की सबसे महत्वाकांक्षी राजमार्ग अवसंरचना परियोजनाओं में से एक है। लगभग 1,386 किलोमीटर की नियोजित लंबाई और लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित परियोजना लागत के साथ, यह पूरा होने पर देश का सबसे लंबा एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे बन जाएगा।

दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच संपर्क को बढ़ाएगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 12 फरवरी 2023 को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के पहले पूर्ण खंड - राजस्थान में 246 किलोमीटर लंबे दिल्ली-दौसा-लालसोट खंड का उद्घाटन किया। सकी लागत 12,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके बाद 22 फरवरी 2024 को गुजरात में 87 किलोमीटर लंबे वडोदरा-भरूच खंड का उद्घाटन किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने 05 जून 2026 को गुजरात के दो अतिरिक्त खंडों - 36 किलोमीटर लंबे किम-ईना खंड और 27.5 किलोमीटर लंबे गांदेवा-ईना खंड का उद्घाटन किया। इस परियोजना से यात्रा का समय कम होने, रसद दक्षता में सुधार होने और इस गलियारे से औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे: क्षेत्रीय संपर्क में परिवर्तन

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे ने दिल्ली और मेरठ के बीच तेज़, सुरक्षित और अधिक कुशल यात्रा को संभव बनाकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में संपर्क में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया है। लगभग 8346 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित और लगभग 82 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे यात्रियों और व्यवसायों दोनों के यात्रा के समय को काफी कम कर देता है।

यह परियोजना विभिन्न चरणों में पूरी हुई जिसके विभिन्न खंडों का उद्घाटन 2018 और 2021 के बीच किया गया। आज यह भारत की सबसे सफल शहरी-क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं में से एक है जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को सुगम बनाती है, भीड़भाड़ को कम करती है और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देती है।

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द्वारका एक्सप्रेसवे: शहरी परिवहन में एक नया मानदंड

द्वारका एक्सप्रेसवे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शहरी परिवहन अवसंरचना के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लगभग 29 किलोमीटर लंबी और लगभग 9,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस परियोजना ने दिल्ली और गुरुग्राम के बीच संपर्क को काफी हद तक बेहतर बनाया है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने मार्च 2024 में एक्सप्रेसवे के हरियाणा खंड का और इसके बाद अगस्त 2025 में दिल्ली खंड का उद्घाटन किया। इस प्रकार यह महत्वपूर्ण शहरी परिवहन गलियारा पूरा हुआ। उन्नत इंजीनियरिंग समाधानों, बहुस्तरीय इंटरचेंजों और आधुनिक यातायात प्रबंधन प्रणालियों वाला यह एक्सप्रेसवे भीड़-भाड़ को कम करने, यात्रा में सुधार करने और क्षेत्र की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होगा।

बेंगलुरु-मैसूरू एक्सप्रेसवे: दक्षिण भारत में विकास को गति

बेंगलुरु-मैसूरु एक्सप्रेसवे दक्षिण भारत की एक ऐतिहासिक अवसंरचना परियोजना के रूप में उभरा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने लगभग 8,480 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित और 118 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 12 मार्च 2023 को किया।

इस परियोजना से बेंगलुरु और मैसूरु के बीच यात्रा का समय लगभग तीन घंटे से घटकर लगभग 75 मिनट हो गया है ससे आवागमन, सड़क सुरक्षा और आरामदायी यात्रा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इससे वाणिज्यिक संपर्क भी मजबूत हुए हैं पर्यटन को बढ़ावा मिला है और क्षेत्रीय आर्थिक विकास के लिए नए अवसर सृजित हुए हैं, साथ ही यह देश में उच्च गुणवत्ता वाले राजमार्ग अवसंरचना विकास के लिए एक आदर्श है।

 

दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा: संपर्क, सतत और क्षेत्रीय विकास में परिवर्तन

दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा इंजीनियरिंग का एक आश्‍चर्य है। यह उच्च गति, दक्षता और पर्यावरण के अनुकूल राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के निर्माण पर भारत के निरंतर ध्यान को दर्शाता है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 12,000 करोड़ रुपये की लागत से विकसित, 213 किलोमीटर लंबे छह लेन वाले इस एक्सेस-कंट्रोल्ड गलियारे का 14 अप्रैल 2026 को उद्घाटन किया। इस गलियारे से दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा का समय 6 घंटे से घटकर लगभग 2.5 घंटे हो गया है और यात्रा की दूरी 235 किलोमीटर से घटकर 213 किलोमीटर हो गई है। ससे यात्राएं न केवल तेज बल्कि अधिक ईंधन-कुशल और सुगम भी हो गई हैं।

दिल्ली-देहरादून गलियारे की एक प्रमुख विशेषता सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण है। गणेशपुर और देहरादून के बीच का 20 किलोमीटर लंबा भाग राजाजी राष्ट्रीय उद्यान और शिवालिक संरक्षित वन के बीच स्थित पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरता है। पारिस्थितिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, इस परियोजना में एशिया के सबसे लंबे एलिवेटेड वन्यजीव गलियारे में से एक 12 किलोमीटर लंबा गलियारा और 'दात-काली' मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग शामिल है। इस गलियारे ने उन्नत अभियांत्रिकी और पर्यावरण संवेदनशीलता के संयोजन से न केवल संपर्क को नया रूप दिया है, बल्कि यह सतत राष्ट्रीय राजमार्ग विकास के लिए एक आदर्श भी है।

 

विकसित भारत के सपने को साकार करना

पिछले बारह वर्षों में सड़क और राजमार्ग क्षेत्र में जो परिवर्तन हुए हैं, वह "विश्वास, विकास और जन कल्याण के बारह वर्ष" की भावना का प्रतीक है। भारत ने निरंतर निवेश, नीतिगत सुधारों और त्वरित अवसंरचना विकास के माध्यम से संपर्क को मजबूत किया है, आर्थिक अवसरों को बढ़ाया है और लाखों नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार किया है।

भारतमाला परियोजना के कार्यान्वयन और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के विस्तार से लेकर रिकॉर्ड निर्माण गति और प्रतिष्ठित एक्सप्रेसवे के विकास तक, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की उपलब्धियां बुनियादी ढांचे के विकास और राष्ट्र निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

जैसे-जैसे भारत विकसित भारत की परिकल्पना की ओर आगे बढ़ रहा है, एक आधुनिक, कुशल और अनुकूल राजमार्ग नेटवर्क आने वाली पीढ़ियों के लिए विकास, समृद्धि और समावेशी विकास के एक शक्तिशाली इंजन के रूप में काम करता रहेगा।

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पीके/केसी/पीपी/आरके


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