• Sitemap
  • Advance Search
कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

प्राकृतिक खेती के विस्तार, किसानों की आय वृद्धि एवं टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए समग्र प्रयास आवश्यक : श्री शिवराज सिंह चौहान


दुनिया में प्राकृतिक खेती उत्पादों की बढ़ती मांग भारत के किसानों के लिए बड़ा अवसर : श्री शिवराज सिंह चौहान

मॉडल फार्म, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और कृषि शिक्षा के माध्यम से प्राकृतिक खेती को मिलेगी नई गति

किसानों की लागत, उत्पादकता, मूल्य एवं लाभ का वैज्ञानिक आकलन करने के निर्देश

प्रविष्टि तिथि: 01 SEP 2026 4:24PM by PIB Delhi

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज प्राकृतिक खेती से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों एवं राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन (NMNF) की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में प्राकृतिक खेती के विस्तार, किसानों के पंजीकरण एवं प्रमाणन, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, प्रशिक्षण, अनुसंधान, बाजार संपर्क, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) तथा प्राकृतिक खेती के आर्थिक प्रभावों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में प्राकृतिक खेती के अंतर्गत अब तक हुई प्रगति, राज्यों में चल रही गतिविधियों, किसानों की भागीदारी तथा मिशन के आगामी लक्ष्यों पर प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुति में बताया गया कि वर्तमान में देशभर में 24 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं तथा राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के अंतर्गत वर्ष 2030 तक 85 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में मिशन के आगामी चरणों में प्राकृतिक खेती के विस्तार को और गति देने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

प्राकृतिक खेती के आर्थिक प्रभावों के वैज्ञानिक आकलन पर जोर

बैठक के दौरान श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती को केवल एक कृषि पद्धति के रूप में नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती से किसानों को होने वाले वास्तविक लाभों का व्यापक एवं वैज्ञानिक आकलन किया जाए।

उन्होंने कहा कि किसानों की उत्पादकता, उत्पादन लागत, बाजार मूल्य और शुद्ध आय का तुलनात्मक अध्ययन किया जाना चाहिए ताकि यह स्पष्ट रूप से सामने आ सके कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए किस प्रकार लाभकारी सिद्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में आगे बढ़ते समय लागत में कमी और उत्पादों के बेहतर मूल्य प्राप्त करने के पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

श्री चौहान ने कहा कि किसानों के अनुभवों, वैज्ञानिक अध्ययनों तथा जमीनी स्तर के आंकड़ों को एकत्र कर व्यापक विश्लेषण किया जाए, जिससे प्राकृतिक खेती के आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों का स्पष्ट दस्तावेज तैयार किया जा सके।

विश्व बाजार में प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग का लाभ उठाने की आवश्यकता

कृषि मंत्री ने कहा कि विश्वभर में प्राकृतिक एवं रसायन-मुक्त कृषि उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत के किसानों के पास इस बढ़ती मांग का लाभ उठाने का बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादित वस्तुओं की ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन, प्रमाणन तथा बाजार संपर्क को मजबूत कर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।

बैठक में प्राकृतिक खेती उत्पादों के विपणन, निर्यात संभावनाओं तथा विभिन्न राज्यों द्वारा विकसित किए गए सफल बाजार मॉडलों पर भी चर्चा की गई। साथ ही प्राकृतिक खेती उत्पादों के लिए मजबूत मूल्य श्रृंखला (Value Chain) विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड एवं वैज्ञानिक आधार तैयार करने पर चर्चा

बैठक में मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) कार्यक्रम की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रस्तुति में विभिन्न राज्यों द्वारा किए गए मृदा नमूना संग्रहण, परीक्षण तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड निर्माण की स्थिति की जानकारी दी गई।

श्री चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती के प्रभावों को मापने और वैज्ञानिक आधार तैयार करने के लिए मृदा स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का व्यवस्थित संकलन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों के खेतों की मृदा स्थिति का नियमित आकलन किया जाए तथा उपलब्ध आंकड़ों का उपयोग भविष्य की योजना निर्माण प्रक्रिया में किया जाए।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्राकृतिक खेती के प्रभावों के मूल्यांकन तथा किसानों को उपयुक्त पोषक तत्व प्रबंधन संबंधी सलाह उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

प्रमाणन व्यवस्था और एफपीओ को मजबूत बनाने पर चर्चा

बैठक में PGS-India Natural Certification System के अंतर्गत किसानों के पंजीकरण और प्रमाणन की प्रगति की समीक्षा की गई। प्रस्तुति में बताया गया कि 80,034 किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 100 प्राकृतिक खेती आधारित एफपीओ तथा 162 जैविक खेती आधारित एफपीओ सहित कुल 262 एफपीओ प्रमाणन प्रणाली से जुड़े हैं।

इस दौरान प्रमाणन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने, किसानों की बाजार तक पहुंच बढ़ाने तथा एफपीओ के माध्यम से प्राकृतिक खेती उत्पादों के विपणन को मजबूत करने पर चर्चा हुई। विभिन्न राज्यों में विकसित सफल विपणन मॉडलों और किसानों को बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने की पहलों की भी समीक्षा की गई।

नमामि गंगे क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की प्रगति की समीक्षा

बैठक में नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत प्राकृतिक खेती की प्रगति की भी समीक्षा की गई। प्रस्तुति में बताया गया कि बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के 45 जिलों में 777 क्लस्टरों के माध्यम से 97,125 किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा गया है तथा 38,850 हेक्टेयर क्षेत्र को इसके दायरे में लाया गया है। नमामि गंगे क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के विस्तार, किसानों के प्रशिक्षण तथा सफल मॉडलों के प्रचार-प्रसार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।

मॉडल फार्म और किसानों के फील्ड विजिट पर विशेष जोर

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती के सफल मॉडलों को अधिकाधिक किसानों तक पहुंचाने के लिए मॉडल फार्मों का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि किसानों के लिए नियमित अध्ययन भ्रमण (Field Visits) आयोजित किए जाएं ताकि वे प्राकृतिक खेती के सफल उदाहरणों को प्रत्यक्ष रूप से देख सकें और उनसे सीख सकें।

उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs), कृषि विश्वविद्यालयों तथा अन्य संस्थानों द्वारा विकसित मॉडल फार्मों को ज्ञान एवं प्रशिक्षण केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

कृषि शिक्षा में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश

बैठक में कृषि विश्वविद्यालयों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों में प्राकृतिक खेती को मुख्यधारा में लाने से संबंधित प्रयासों की समीक्षा की गई। श्री चौहान ने कहा कि कृषि विद्यार्थियों को प्राकृतिक खेती का व्यावहारिक ज्ञान उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि भविष्य के कृषि विशेषज्ञ इस क्षेत्र में किसानों का बेहतर मार्गदर्शन कर सकें।

उन्होंने कृषि शिक्षा संस्थानों में प्राकृतिक खेती आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, फील्ड डेमोंस्ट्रेशन तथा व्यवहारिक शिक्षण गतिविधियों को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना समयबद्ध रूप से पूरी करने के निर्देश

इस दौरान प्राकृतिक खेती के लिए प्रस्तावित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना से संबंधित प्रगति की भी समीक्षा की गई। श्री चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना से संबंधित प्रक्रियाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए ताकि अनुसंधान, नवाचार, क्षमता निर्माण तथा तकनीकी सहयोग को और अधिक गति मिल सके।

प्राकृतिक खेती के विस्तार, किसानों की आय वृद्धि, मृदा स्वास्थ्य सुधार, प्रमाणन, प्रशिक्षण, अनुसंधान तथा बाजार संपर्क से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। श्री चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती को व्यापक जन-आंदोलन के रूप में विकसित करने के लिए केंद्र और राज्यों को समन्वित रूप से कार्य करना होगा, जिससे किसानों की आय बढ़े, कृषि लागत कम हो और देश में टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिल सके।

समीक्षा बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री अतिश चंद्र सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) तथा अन्य संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

*****

आरसी/एमएस/डीके


(रिलीज़ आईडी: 2305497) आगंतुक पटल : 126