• Sitemap
  • Advance Search
कोयला मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी का 16वां चरण आरंभ; छह कोयला खदानों के लिए कोयला खदान विकास और उत्पादन समझौते

प्रविष्टि तिथि: 17 SEP 2026 5:13PM by PIB Delhi

कोयला मंत्रालय ने आज नई दिल्ली में वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के 16वें चरण का सफल शुभारंभ किया। कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे मुख्य अतिथि के रूप इसमें शामिल हुए।

श्री दुबे ने वाणिज्यिक कोयला खदानों की नीलामी के 16वें चरण का शुभारंभ किया और कोयला सचिव श्री विक्रम देव दत्त के साथ मिलकर पिछले दौर में नीलाम की गई छह कोयला खदानों के सफल बोली लगाने वाली कंपनियों को कोयला खदान विकास और उत्पादन समझौते-सीएमडीपीए दस्‍तावेज सौंपे।

तारा (संशोधित), मार्गो वेस्ट, मार्गो ईस्ट, मंडला साउथ, डोंगरी ताल-II और प्रकासम खनी ओपन कास्ट के डिप साइड के लिए सीएमडीपीए निष्पादित किए गए। सफल बोली लगाने वालों में सीजी सिन-गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड, झारखंड एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड, क्यूब कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड, गैलेंट इस्पात लिमिटेड और सिंगारेनी कोलियरीज लिमिटेड शामिल हैं।

इन छह खदानों में कुल मिलाकर लगभग 1,504 मिलियन टन कोयला भंडार है और इनकी संयुक्त अधिकतम उत्पादन क्षमता प्रति वर्ष 11.62 मीट्रिक टन है। परिचालन आरंभ होने पर, इनसे लगभग 1,984 करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व प्राप्त होने, करीब 1,743 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश आकर्षित होने और संबंधित कोयला उत्पादक क्षेत्रों में लगभग 15 हजार 700 रोजगार सृजित होने की संभावना है।

16वें चरण में नौ कोयला उत्पादक राज्यों - अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में व्‍याप्‍त 25 कोयला खंड पेश किए गए हैं, जिनमें 21 पूर्ण रूप से और चार आंशिक रूप से खोजे गए खदान शामिल हैं। इनमें छह कोयला खदानें, कोयला खान विशेष प्रावधान अधिनियम के तहत और 19 खदानें-खनिज विकास और विनियमन अधिनियम के तहत पेश की गई हैं। ये कोयला खंड अनुभवी खनन कंपनियों, नए प्रवेशकों और प्रौद्योगिकी-आधारित उद्यमों के लिए उदार वाणिज्यिक कोयला खनन ढांचे के तहत खोले गए हैं, जिसमें अंतिम उपयोग प्रतिबंध नहीं है। इनमें स्वचालित मार्ग से 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है और भविष्य के राजस्व हिस्से आधार पर समायोजन के लिए कम अग्रिम भुगतान का प्रावधान है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा 2020 में इस क्षेत्र को वाणिज्यिक खनन के लिए खोले जाने के बाद मौजूदा चरण शुरू होने के साथ ही वाणिज्यिक कोयला खनन कार्यक्रम के सोलह चरण पूरे हो गए हैं। अब तक कुल 147 कोयला खदानों की नीलामी हुई है, जिनसे कोयला उत्पादन करने वाले नौ राज्यों में 47,500 करोड़ रुपये से अधिक अनुमानित वार्षिक राजस्व और 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक अनुमानित पूंजी निवेश प्राप्त होने की उम्मीद है।

नई दिल्ली में वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के 16वें चरण की शुरूआत के अवसर पर कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने भारत के विकास में कोयले की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्‍लेख किया। उन्होंने कहा कि देश की लगभग 55 प्रतिशत प्राथमिक ऊर्जा आवश्यकता और 70 प्रतिशत से अधिक विद्युत उत्पादन कोयले से ही पूरा होता है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के मार्गदर्शन में कोयला उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि रेखांकित रेखांकित की, जो लगातार दूसरे वर्ष 1 अरब टन से अधिक रही है। यह भारत के घरेलू कोयला क्षेत्र की सुदृढता और ऊर्जा सुरक्षा में इसके बढ़ते योगदान को दर्शाता है।

श्री दुबे ने पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और प्रौद्योगिकी-आधारित प्रक्रियाओं द्वारा कोयला क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए सरकार के प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने हितधारकों को समान अवसर प्रदान करने और वाणिज्यिक कोयला खनन में निवेश और व्यापक भागीदारी अनुकूल माहौल बनाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने भारत के घरेलू कोयला संसाधनों के उपयोग, उत्पादन बढ़ाने और आयात निर्भरता कम करने के साथ ही देश के कोयला भंडारों का कुशल और संवहनीय उपयोग सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। श्री दुबे ने हितधारकों से वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी प्रक्रिया में सक्रियता से भाग लेने और भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।

 

कोयला मंत्रालय में अपर सचिव और मनोनीत प्राधिकारी सुश्री रुपिंदर बरार ने अपने स्वागत भाषण में, भारत के कोयला क्षेत्र के पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-आधारित और प्रतिस्पर्धी पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव पर जोर दिया। उन्होंने हाल के वर्षों में कैप्टिव (यह किसी विशेष कंपनी-स्टील या बिजली संयंत्र को अपनी खुद की जरूरतें पूरी करने के लिए आवंटित की जाती है) और वाणिज्यिक खानों (इन खदानों से निकाले गए कोयले स्‍वयं उपयोग या बाजार में किसी को भी बेचा जा सकता है) से कोयला उत्पादन में हुई बढोत्‍तरी का उल्लेख करते हुए कहा कि ऊर्जा ही विकास, उन्नति और प्रगति का आधार है।

सुश्री बरार ने घरेलू संसाधनों को उपयोग में लाने, उत्पादन बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और नए अवसर के लिए देश के कोयला क्षेत्र की अपार क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मनोनीत प्राधिकरण कार्यालय सभी हितधारकों के लिए खुला और सुलभ है। यह संवाद सुगमता प्रदान करता है और वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए अनुकूल और पारदर्शी ढांचा सुनिश्चित करने हेतु उनकी चिंताओं और सवालों का समाधान करता है।

 

इस अवसर पर कोयला मंत्रालय के अपर सचिव श्री सनोज कुमार झा ने भारत के प्रचुर कोयला संसाधनों के मूल्यवर्धन और नवीन उपयोग के महत्वपूर्ण उपाय के रूप में कोयला गैसीकरण पर बढ़ते ध्यान की चर्चा की। उन्होंने अगली पीढ़ी के कोयला उपयोग के लिए तेजी से प्रौद्योगिकी अपनाने और पारितंत्र मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। श्री झा ने भारत की आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करते हुए वैश्विक प्रौद्योगिकी अपनाने और सर्वोत्तम प्रथा सीखने के महत्व पर भी बल दिया। उन्‍होंने कहा कि प्रौद्योगिकी, नवाचार और वैश्विक विशेषज्ञता कोयला उपयोग में नई संभावनाएं उत्‍पन्‍न कर सकती हैं और इससे अधिक कुशल, संवहनीय और भविष्योन्‍मुखी कोयला क्षेत्र तैयार हो सकता है।

कोयला क्षेत्र में नवीन सुधारों, अधिक भागीदारी और निवेश को बढ़ावा देने तथा भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों के अनुरूप भरोसेमंद और किफायती ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कोयला मंत्रालय प्रतिबद्ध है।

****

पीके/केसी/केवी/एमपी


(रिलीज़ आईडी: 2311582) आगंतुक पटल : 61
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu