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सीएक्यूएम के अध्यक्ष के नेतृत्व में उच्चस्तरीय दल ने रोपड़, होशियारपुर और अमृतसर में धान की पराली के प्रबंधन संबंधी उपायों की समीक्षा की

प्रविष्टि तिथि: 23 OCT 2026 7:32PM by PIB Delhi

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय दल ने पंजाब के रोपड़, होशियारपुर और अमृतसर में ताप विद्युत संयंत्रों, सीबीजी संयंत्रों, कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), कृषि क्षेत्रों और एक बायोमास संयंत्र का दौरा किया। दल ने तैयारियों की समीक्षा की और धान की वर्तमान कटाई के मौसम के दौरान धान की पराली के प्रभावी प्रबंधन तथा पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए जमीनी स्तर पर लागू किए जा रहे विभिन्न आंतरिक और बाहरी उपायों की स्थिति का जायजा लिया। सीएक्यूएम ने राज्य के अधिकारियों को ताप विद्युत संयंत्रों में को-फायरिंग   के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने का निर्देश दिया। साथ ही, उत्सर्जन मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) के दौरे के दौरान दल ने पराली के यथावत और बाहरी उपयोग के लिए मशीनों का प्रदर्शन भी देखा।

 

दल ने धान की पराली के प्रबंधन में किसानों की सहायता के लिए मशीनों की पर्याप्तता और उपलब्धता का भी आकलन किया। इसके अतिरिक्त, दल ने बाहरी प्रबंधन के तहत धान की पराली का उपयोग करने वाले ताप विद्युत संयंत्रों और बायोमास संयंत्रों में धान की पराली के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए की गई व्यवस्थाओं और स्थापित तंत्रों की समीक्षा की।

धान की कटाई में तेजी आने के साथ ही आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि सभी संबंधित प्राधिकरण किसानों को समय पर फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अपने प्रयासों को और तेज करें तथा उनमें समन्वय स्थापित करें। आयोग ने निर्देश दिया कि किसानों को अधिकतम सहायता प्रदान की जाए। विशेष रूप से, कटाई के चरम समय के दौरान उभरती आवश्यकताओं के अनुरूप मशीनों की उपलब्धता और उनके प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाए।

आयोग ने राज्य प्राधिकरणों को पराली जलाने की घटनाओं को न्यूनतम करने के लिए धान की पराली के प्रबंधन से संबंधित इन व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने का निर्देश दिया। धान की पराली प्रबंधन के लिए जारी उपायों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने हेतु खेतों में सक्रिय निगरानी रखने और परिचालन संबंधी कमियों को समय पर दूर करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

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