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Press Information Bureau
Government of India
वित्‍त मंत्रालय
11 OCT 2018 1:46PM by PIB Delhi
विश्व बैंक का मानव पूंजी सूचकांक जारी

विश्व बैंक ने विश्व विकास दर 2019 के एक भाग के रूप में मानव पूंजी सूचकांक जारी किया है.

इस साल के विश्व विकास रिपोर्ट की थीम "कार्य के बदलते स्वरूप" रखी गई है. इस रिपोर्ट के एक हिस्से के रूप में विश्व बैंक ने मानव पूंजी कार्यक्रम की भी शुरुआत की है. जैसा कि बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम का लक्ष्य मानव पूंजी को तैयार करने की मांग को देखते हुए इस पर बहस, इसका पैमाना बनाने और इसका विश्लेषण करना है. इस कार्यक्रम के तीन प्रमुख हिस्से है. मानव पूंजी की गणना के लिए मानव पूंजी सूचकांक, नीतिगत फैसले लेने के लिए रिसर्च प्रोग्राम और देश में मानव पूंजी में निवेश को रफ्तार देने के लिए एक प्रोग्राम. मानव पूंजी सूचकांक 157 देशों में बनाया गया है.

मानव पूंजी सूचकांक में तीन चीजें हैं:

(1) 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर

(2) गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा प्राप्त की हो जिसमें शिक्षा की गुणवत्ता और संख्या (गुणवत्ता का माप अंतर्राष्ट्रीय स्कूलों के उपलब्धि मापक प्रोग्राम और संख्या का मतलब उस बच्चे ने 18 साल की उम्र तक संबंधित देश के ग्रेड पैटर्न के हिसाब से कक्षा में दाखिल होकर शिक्षा हासिल की हो) दोनों के हिसाब से और

(3) स्वास्थ्य मंत्रालय दो मानदंडों (क) वयस्क जीवन दर और (ख) 5 साल तक के बच्चों के विकास में बाधा.

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम कई सालों से मानव विकास सूचकांक रिपोर्ट तैयार करता रहा है. मानव पूंजी सूचकांक स्वास्थ्य और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा से मिलाकर बनाए गए जीवन प्रत्याशा दर की बजाए सिर्फ स्कूल में बिताए वर्षों, जीवन दर और विकास बाधा दर के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करता है. मानव पूंजी सूचकांक प्रति व्यक्ति आय को भी इसमें शामिल नहीं करता जबकि मानव विकास दर की रिपोर्ट में ये शामिल हैं. मानव विकास सूचकांक में दो खास बदलाव किए गए हैं जिसमें आय को शामिल नहीं किया गया है और शिक्षा की गुणवत्ता के स्तर को नहीं देखा गया है. आय और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को मानक में शामिल नहीं करने से ये मानव पूंजी सूचकांक मनुष्य के विकास को उस तरह से प्रतिनिधित्व नहीं करता जैसा कि ये सूचकांक दावा कर रहा है.

फंड बैंक की सालाना बैठक में जारी किया गया पहला मानव पूंजी सूचकांक इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि दुनिया की 56% आबादी के लिए ये 0.50 या उससे भी नीचे है, जबकि 92% आबादी के लिए ये 0.75 या उससे भी नीचे है. सिर्फ 8% आबादी को ही ये सूचकांक 75% उत्पादक मानता है.

ये मानव पूंजी सूचकांक हर देश को अधिकतम मूल्यांकन 1 मानकर चल रहा है. जैसा कि सभी जानते हैं विकसित अर्थव्यवस्थाएं जैसे उत्तरी अमेरिका या  यूरोप के देशों का सूचकांक ज्यादातर 0.75 के ऊपर है, जबकि दक्षिण एशिया और उप सहारा अफ्रीकी देशों का मानव पूंजी सूचकांक क्षेत्र में सबसे कम है. भारत के लिए मानव पूंजी सूचकांक 0.44 माना गया है. भारत की शिक्षा की मात्रा नापने के लिए 2009 के डेटा का इस्तेमाल किया गया है.

मानव पूंजी सूचकांक रिपोर्ट में भारत के संबंध में अवलोकन निम्नलिखित है:

•        मानव पूंजी सूचकांक: भारत में जन्मा एक बच्चा जब बड़ा होता है तो वो किसी पूर्ण शिक्षित और पूर्ण रूप से स्वस्थ बच्चे के मुकाबले 44% ही परिपूर्ण होता है.

•        भारत में मानव पूंजी सूचकांक पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में थोड़ा बेहतर है.

•        पिछले 5 सालों के दौरान भारत में मानव पूंजी सूचकांक दर थोड़ी बेहतर हुई है.

•        5 साल की उम्र तक जीवन की संभावना: भारत में पैदा हुए 100 में से 96 बच्चों में 5 साल तक जीवित रहने की संभावना होती है

•        स्कूल में संभावित वर्ष: भारत में 4 साल से स्कूल जाने वाले बच्चे का 18 साल की उम्र तक 10.2 साल स्कूली शिक्षा पूरी करने की उम्मीद है.

•        अनुकूलन टेस्ट स्कोर: भारतीय छात्रों का दक्षता स्कोर 355 है जबकि 625 स्कोर वाले बच्चे को एडवांस और 300 स्कोर वाले बच्चे को बेहद न्यूनतम रूप से दक्ष माना जाता है.

•        स्कूली शिक्षा: स्कूल में बच्चे क्या पढ़ते हैं इसके आधार पर अनुमानित स्कूली शिक्षा 5.8 साल है.

•        वयस्क जीवन दर: भारत में 15 साल के 83% लोग 60 साल तक जीवित रहेंगे.

•        स्वस्थ विकास: 100 में से 62 बच्चों का विकास बाधित नहीं हुआ है. 100 में से 38 बच्चों का विकास बाधित हुआ है, ऐसे में वो अपना पूरा जीवन स्वस्थ और बिना खतरे के बिता पाएंगे इस पर संदेह है.

•        लिंगानुपात: भारत में मानव पूंजी सूचकांक की दर लड़कों के मुकाबले लड़कियों में थोड़ी ज्यादा है.

भारत के संदर्भ में मानव पूंजी सूचकांक की गणना में उन पहलों को शामिल नहीं किया गया है जिसे सरकार ने मानव पूंजी के विकास के लिए की है. 19 करोड़ 70 लाख बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए समग्र शिक्षा अभियान की शुरुआत की गई है. आयुष्मान भारत योजना के जरिए भारत ने दुनिया की सबसे बड़ी जीवन बीमा योजना शुरू की है जो कि 50 करोड़ लोगों को पूरी स्वास्थ्य सुरक्षा दे रही है. 1 लाख 50 हजार स्वास्थ्य केंद्रों को सरकार स्वास्थ्य कल्याण केंद्र के रूप में बदल रही है जिससे स्वास्थ्य संबंधी सारी जरूरतें पूरी की जा सकें. स्वच्छ भारत अभियान के जरिए देश में स्वच्छता को 2014 के 38% क्षेत्रों से बढ़ाकर 2018 में 83% क्षेत्रों तक कवर किया गया है.

भारत सरकार ने फैसला किया है कि वो मानव पूंजी सूचकांक को दरकिनार कर भारत के सभी बच्चों को ध्यान में रखते हुए मानव पूंजी विकास के कार्यक्रमों को तेजी से लागू कर उनकी जिंदगी बदलने की कोशिश करेंगे. 

 

आर.के.मीणा/एएम/पीकेटी-10694