Social Welfare
महिलाओं की आर्थिक उन्नति के लिए प्रमुख कदम
Posted On:
06 MAR 2026 11:26AM
महिलाओं के वित्तीय सशक्तीकरण की दिशा में भारत की यात्रा
महिलाओं के सशक्तीकरण से जीवंत परिवारों, उन्नतिशील समुदायों और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण होता है। इस सच को स्वीकार करते हुए महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता के भारत के परिदृश्य में पिछले 10 वर्षों में उल्लेखनीय बदलाव आया है। सरकार ने कौशलों, ऋण, बाजारों और आजीविकाओं तक महिलाओं की पहुंच के विस्तार को प्राथमिकता दी है। इस प्रयास में ग्रामीण और वंचित महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य 2047 तक एक ऐसे विकसित भारत का निर्माण करना है जिसमें हर महिला प्रगति में बराबर की भागीदार होगी।
भारत सरकार इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए योजनाओं के एक व्यापक समूह के माध्यम से काम कर रही है। इनमें स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और लक्षित ऋण से लेकर ड्रोन प्रौद्योगिकी और उद्यमिता मंच तक संबंधित योजनाएं शामिल हैं। सरकार ने वित्तीय समावेशन के लिए डिजिटल साधनों और सहकारिता नेटवर्क में भी निवेश किया है। इन उन्नतियों से भारत महिला आर्थिक नेतृत्व के वैश्विक मॉडल के तौर पर उभर रहा है।
‘नारी शक्ति’ का मार्गदर्शक बल एक ऐसा समावेशी विकास सुनिश्चित करता है जिसमें कोई भी महिला पीछे नहीं छूटेगी।
लड़कियों के लिए वित्तीय सुरक्षा
लड़कियों के लिए वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने का मतलब उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक अवसरों तक पहुंच के लिए सही निवेश करना है। इससे वे अपने लिए स्वतंत्र और गरिमामय जीवन का निर्माण कर सकेंगी। इससे सिर्फ व्यक्ति ही नहीं, बल्कि परिवारों, समुदायों और समूचे राष्ट्र का भविष्य भी मजबूत होगा।
सुकन्या समृद्धि योजना इस संकल्प को पूरा करती है। यह अपनी बेटी के सुनहरे भविष्य में निवेश करने वाले हर परिवार को ऊंचा प्रतिफल, टैक्स लाभ और अविचल समर्थन मुहैया कराती है।
सुकन्या समृद्धि योजना

सुकन्या समृद्धि योजना की शुरुआत 22 जनवरी 2015 को ‘बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के अंतर्गत की गई। इस योजना में बालिकाओं को वित्तीय सुरक्षा प्रदान की जाती है। यह अभिभावकों को शिक्षा और विवाह समेत बालिकाओं की भविष्य की जरूरतों के लिए धन बचाने में मदद करने वाली एक सरकारी बचत योजना है। यह योजना उच्च ब्याज दर, टैक्स लाभ और सुरक्षा देकर परिवारों को बालिकाओं की प्रगति और स्वतंत्रता के लिए उनकी कम उम्र में ही निवेश के लिए प्रोत्साहित करती है।
इस योजना की विशेषताएं और लाभ इस प्रकार हैं-
- 8.2 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि ब्याज दर।
- 50 रुपए के गुणक में सालाना 250 रुपए से 1.5 लाख रुपए तक की राशि जमा की जा सकती है।
- 15 साल के लिए बचत की इजाजत। खाता खोले जाने से 21 साल के बाद परिपक्व होता है।
- धारा 80 सी के अंतर्गत ब्याज और परिपक्वता राशि टैक्स मुक्त।
- बालिका के 18 साल की होने या 10वां दर्जा उत्तीर्ण करने के बाद उच्च शिक्षा या विवाह के लिए 50 प्रतिशत तक राशि की आंशिक निकासी का प्रावधान।
योजना के शुरू होने से लेकर दिसंबर 2025 तक इसमें कुल 3.33 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा राशि जमा की जा चुकी है।
ग्रामीण आजीविका में क्रांतिकारी बदलाव, प्रौद्योगिकी का उपयोग
ग्रामीण भारत में एक विलक्षण बदलाव दिखाई दे रहा है। सामुदायिक बल, कौशल निर्माण और संसाधनों तक पहुंच से लाखों परिवारों के लिए नए अवसरों के द्वार खुल रहे हैं। भारत सरकार अपनी दूरदृष्टि तथा प्रौद्योगिकी आधारित और लोक केंद्रित पहलकदमियों से ग्रामीण परिवारों और खास तौर से महिलाओं को आत्मविश्वासी उद्यमी, कुशल उत्पादक तथा उन्नतिशील अर्थव्यवस्था का सक्रिय योगदानकर्ता बनने में समर्थ बना रही है।
दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम)
डीएवाई-एनआरएलएम ग्रामीण विकास मंत्रालय का एक प्रमुख कार्यक्रम है। यह ग्रामीण महिलाओं को एकजुट कर उन्हें स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जोड़ता है। इससे उनमें समुदाय और आपसी विश्वास की भावना मजबूत होती है। इन स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं और उनके परिवारों को कौशल प्रशिक्षण, किफायती ऋण तथा छोटे उद्यम शुरू करने, उच्च आय के अवसरों तक पहुंचने और मौजूदा आजीविका को आगे बढ़ाने का मौका मिलता है।
समय के साथ लगातार समर्थन से उन्हें आमदनी बढ़ाने, भविष्य के लिए बचत करने, बच्चों को स्कूल भेजने तथा अपने परिवारों को मजबूत और ज्यादा सुरक्षित जीवन देने में सहायता मिलती है।
डीएवाई-एनआरएलएम खास तौर से महिलाओं को वित्तीय समावेशन और कौशल प्रशिक्षण के जरिए संवहनीय आजीविका अपनाने में मदद करता है ताकि वे आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।
इस मिशन की कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं-
- इसके अंतर्गत बैंकों की शाखाओं पर प्रशिक्षित बैंक सखियों की तैनाती की जाती है। वे स्वयं सहायता समूहों को बचत खाता, जमा और निकासी, ऋण तथा अन्य बैंकिंग सुविधाओं समेत वित्तीय सेवाओं में सहायता करती हैं।
- समूचे साल परामर्श और मदद देने के लिए प्रशिक्षित कृषि सखी और पशु सखी जैसे सहायताकर्मियों की तैनाती की जाती है।
- इस मिशन के अंतर्गत स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, घरेलू हिंसा शमन और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है।
मिशन की प्रमुख उपलब्धियां-
- इस कार्यक्रम के अंतर्गत 10.05 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिला परिवारों को 90.90 लाख स्वयं सहायता समूहों में एकजुट किया गया है। इस तरह भारत ने महिलाओं के नेतृत्व वाली सामुदायिक संस्थाओं के विश्व के सबसे बड़े नेटवर्कों में से एक को तैयार किया है।
- ऋण वापसी की दर 98 प्रतिशत होने से यह पता चलता है कि ये समूह धन का प्रबंधन कितने अच्छे ढंग से कर रहे हैं।

- डीएवाई-एनआरएलएम कृषि के बेहतर तरीकों से महिला किसानों की मदद करता है। इससे अक्टूबर 2025 तक 4.6 करोड़ से ज्यादा महिलाएं लाभान्वित हो चुकी हैं।
- अनेक महिलाएं स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (स्वेप) जैसे कार्यक्रमों के जरिए हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य क्षेत्रों में छोटे व्यवसाय शुरू करती हैं। इस कार्यक्रम के तहत 5.88 लाख से ज्यादा ऐसी इकाइयों की मदद की गई है।
नमो ड्रोन दीदी योजना

नमो ड्रोन दीदी योजना एक परिवर्तनकारी केंद्रीय क्षेत्र की पहल है। यह चुनिंदा महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन से लैस करके ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाती है, ताकि वे कृषि के लिए किराये पर सेवाएं प्रदान कर सकें। इसका मुख्य उद्देश्य खेती में उन्नत तकनीक को शामिल करते हुए मुख्य रूप से तरल उर्वरकों और कीटनाशकों के छिड़काव के माध्यम से महिलाओं के लिए स्थायी आय के अवसर पैदा करना है।
योजना के मुख्य लाभों में शामिल हैं:
- कुशल और बेहतर ढंग से कृषि करने के लिए आधुनिक ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल करना।
- फसलों की उपज को बढ़ाना और किसानों के लिए कृषि लागत तथा परिचालन व्यय को कम करना।
- ड्रोन किराये पर देने जैसी सेवाओं के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए महत्वपूर्ण अतिरिक्त आय के अवसर सृजित करना, जिससे वित्तीय स्वतंत्रता और विविधता पूर्ण आजीविका को बढ़ावा मिले।
चयनित स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन पैकेज के लिए 80 प्रतिशत केंद्रीय वित्तीय सहायता (अधिकतम 8 लाख रुपये तक) प्रदान की जाती है, जिसमें प्रशिक्षण भी शामिल है: इसके तहत एक सदस्य को प्रमाणित ड्रोन पायलट बनने के लिए 15 दिनों का प्रशिक्षण (संचालन और कृषि-विशिष्ट अनुप्रयोगों सहित) और दूसरी सदस्य को ड्रोन सहायक के रूप में 5 दिनों का प्रशिक्षण (मरम्मत, रखरखाव और सहायता पर केंद्रित) दिया जाता है।
ग्रामीण महिलाओं के हाथों में ड्रोन सौंपकर, यह योजना न केवल कृषि में तकनीक को अपनाने की गति को तेज़ करती है, बल्कि आर्थिक उन्नति के नए रास्ते भी खोलती है। इससे कृषि कार्य अधिक तेज़ और उत्पादक बनता है, साथ ही महिलाओं और उनके समुदायों के लिए बेहतर और उज्ज्वल अवसर पैदा होते हैं।
महिलाओं को सफल उद्यमियों के रूप में बदलना
जब महिलाएँ उद्यमी के रूप में उभरती हैं, तो पूरे परिवार को स्थिरता और नए अवसर मिलते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने महिलाओं के बीच उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए कई पहलकदमियां शुरू की हैं।

लखपति दीदी योजना
लखपति दीदी, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का एक प्रमुख हिस्सा है, जो ग्रामीण गरीबी उन्मूलन और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रयासरत है।
लखपति दीदी योजना महिला नेतृत्व वाली गावों की खुशहाली के दृष्टिकोण पर आधारित है। लखपति दीदी एक स्वयं सहायता समूह की सदस्य होती है, जिसके परिवार की वार्षिक आय स्थायी आजीविका, मजबूत कौशल और ऋण एवं बाजारों तक बेहतर पहुंच के माध्यम से एक लाख रुपये से अधिक होती है, यह वित्तीय स्थिरता, आत्मविश्वास और सामुदायिक नेतृत्व का प्रतीक है।
इसका उद्देश्य केवल आय उत्पन्न करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्यमशीलता और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देना तथा महिलाओं को ग्रामीण आर्थिक परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में स्थापित करना है।
सरकार ने 6 करोड़ लखपति दीदियाँ बनाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को तेज़ी से पूरा करने के लिए, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने जनवरी 2026 में उद्यमिता पर एक राष्ट्रीय अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य 50,000 सामुदायिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से 50 लाख स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को प्रशिक्षित करना है।
तकनीकी रूप से, डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन द्वारा प्रबंधित "लोक ओएस" ऐप और डिजिटल आजीविका रजिस्टर, रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण करते हैं और संभावित लखपति दीदियों की वास्तविक समय पर आय के आंकड़ों पर नज़र रखते हैं।

शी-मार्ट
केंद्रीय बजट 2026-2027 में शी-मार्ट के माध्यम से 'स्वयं सहायता उद्यमियों' के लिए विशेष प्रावधान पेश किए गए हैं। यह नया कार्यक्रम हर जिले में समुदाय के स्वामित्व वाले खुदरा बिक्री केंद्र स्थापित करेगा, जो स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों के विपणन के लिए समर्पित मंच के रूप में कार्य करेंगे, जिससे बाजार के नए अवसर खुलेंगे।
इस पहल के साथ, पशुपालन, कृषि और संबंधित व्यवसायों से जुड़ी महिलाएं केवल घरेलू गतिविधियों से आगे बढ़कर पूर्ण उद्यमी बन सकेंगी—यही इस योजना का मुख्य लक्ष्य है।
'वुमनिया' पहल
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) के एक प्रमुख कार्यक्रम, 'वुमनिया पहल' की शुरुआत 14 जनवरी 2019 को की गई थी। इसका उद्देश्य सार्वजनिक खरीद में महिला-नेतृत्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों तथा स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी को बढ़ावा देना है।
इसे सहायता देने के लिए, जेम (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) ने समझौता ज्ञापनों के माध्यम से महत्वपूर्ण साझेदारियां की हैं:
- स्वरोजगार महिला संघ (सेवा) भारत के साथ महिला नेतृत्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को सरकारी बाजारों तक पहुँचने के लिए प्रशिक्षित और सक्षम बनाने हेतु जनवरी 2023 में समझौता किया गया।
- ऊषा सिलाई स्कूल के साथ महिलाओं को जेम प्लेटफॉर्म पर सेवा प्रदाताओं के रूप में कुशल बनाने के लिए 2023 में साझेदारी की गई।
- यूएन वुमन के साथ जेंडर-रिस्पॉन्सिव (लिंग-उत्तरदायी) खरीद को बढ़ावा देने, प्रशिक्षण सामग्री विकसित करने और महिला उद्यमियों के लिए स्थानीय बाजार संपर्क को मजबूत करने के लिए नवंबर 2025 में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
हाल ही में, 14–15 जनवरी 2026 को, जेम ने 'बिजनेस-टू-गवर्नमेंट' अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने, ऑनबोर्डिंग, अनुपालन, उत्पाद सूचीकरण में सहायता करने और भागीदारी बढ़ाने के लिए संरचित प्रशिक्षण और कार्यशालाएं आयोजित करने हेतु महिला सामूहिक मंच के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
इन सहयोगों ने 'वुमनिया' को एक मजबूत इको सिस्टम के रूप में विकसित होने में मदद की है। जनवरी 2026 तक, दो लाख से अधिक महिला-नेतृत्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यम पंजीकृत हो चुके हैं और उन्होंने 80,000 करोड़ रुपये से अधिक के खरीद आदेश प्राप्त किए हैं—जो जेम के कुल ऑर्डर मूल्य का 4.7 प्रतिशत है और निर्धारित 3 प्रतिशत के अनिवार्य लक्ष्य से कहीं अधिक है।
'वुमनिया' सरकारी खरीदारों के साथ एक प्रत्यक्ष, पारदर्शी और पूरी तरह से डिजिटल इंटरफेस प्रदान करता है और बिचौलियों की जरुरत को समाप्त करता है और साथ ही उन प्रवेश बाधाओं को कम करता है जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से महिलाओं की भागीदारी को सीमित किया है। यह महिला उद्यमियों द्वारा सामना की जाने वाली "बाजार तक पहुंच," "वित्त तक पहुंच," और "मूल्य-वर्धन तक पहुंच" की तिहरी चुनौती का समाधान करने का प्रयास करता है। इसके माध्यम से उन्हें केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों और स्वायत्त निकायों को उत्पाद और सेवाएं देने के लिए भी जोड़ा जाता है।
वित्तीय स्वतंत्रता के लिए अन्य ज़रूरी कदम
महिलाएं लंबे समय से परिवारों और समुदायों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। अब, सरकारी योजनाएं उनके कौशल और प्रयासों को मजबूत आर्थिक अवसरों में बदलने में मदद कर रही हैं।
बेहतर प्रशिक्षण, वित्त और बाजारों तक पहुंच के माध्यम से, ये पहल लाखों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, अपनी आय बढ़ाने और आत्मविश्वास के साथ स्वतंत्र बनने में उन्हें सक्षम बना रही हैं।
प्रधान मंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई)
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, जिसकी शुरुआत 8 अप्रैल 2015 को हुई थी, सूक्ष्म-इकाई उद्यमों को बिना किसी गारंटी के संस्थागत ऋण प्रदान करती है। इसका उद्देश्य उद्यमियों को बिना किसी जमानत के बोझ के नए उद्यम शुरू करने या विस्तार करने के लिए समर्थन देना है। इसके तहत 10 लाख रुपये तक का ऋण दिया जाता है, जिसे अब बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है। यह बढ़ी हुई सीमा एक नई "तरुण प्लस" श्रेणी के तहत उन कर्जदारों के लिए है, जिन्होंने अपने पिछले ऋणों का सफलतापूर्वक भुगतान कर दिया है।

‘मुद्रा’ (माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी लिमिटेड), जिसे प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के तहत शुरू किया गया था और इसकी घोषणा 2015-16 के केंद्रीय बजट में की गई थी, यह भारत सरकार का एक वित्तीय संस्थान है। यह बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (एनबीएफसी) और माइक्रो फाइनेंस संस्थानों (एमएफआई) जैसे अंतिम छोर तक सेवा देने वाले संस्थानों को पुनर्वित्त प्रदान करके गैर-कॉर्पोरेट लघु/सूक्ष्म उद्यमों का वित्त पोषण करता है।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) महिला सशक्तिकरण पर विशेष बल देती है, जिसमें ज़्यादातर खाते महिला उद्यमियों के हैं। इस विशेष फोकस से लाखों महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने या बढ़ाने में मदद की गई है जिससे वित्तीय समावेशन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना

भारत सरकार द्वारा वित्तीय समावेशन के एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में 28 अगस्त 2014 को शुरू की गई प्रधानमंत्री जन-धन योजना का उद्देश्य देश की बैंकिंग सुविधाओं से वंचित आबादी को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। यह योजना बुनियादी बचत बैंक खाते, जमा राशि, ऋण, बीमा और पेंशन जैसी किफायती वित्तीय सेवाओं तक हर व्यक्ति की पहुँच सुनिश्चित करती है।
प्रधानमंत्री जन धन योजना महिलाओं के लिए विशेष रूप से फायदेमंद रही है। पहले, औपचारिक बैंकिंग तक महिलाओं की व्यक्तिगत पहुँच सीमित थी और वे अक्सर वित्तीय मामलों के लिए परिवार के सदस्यों पर निर्भर रहती थीं। लेकिन अब, प्रधानमंत्री जन धन योजना के माध्यम से करोड़ों महिलाओं के अपने बैंक खाते हैं, जिससे उन्हें सरकारी लाभों की सीधी प्राप्ति, बेहतर वित्तीय नियंत्रण और आत्मनिर्भरता एवं स्वतंत्रता के लिए अन्य योजनाओं तक आसान पहुँच प्राप्त हुई है।
प्रधानमंत्री जन-धन योजना की कुछ मुख्य विशेषताएं:
- जमा राशि पर ब्याज के साथ न्यूनतम शेषराशि बनाए रखने की कोई बाध्यता नहीं।
- खाताधारकों को 'रुपे' डेबिट कार्ड जारी किया जाता है, जिसमें 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर मिलता है (28 अगस्त 2018 के बाद खोले गए खातों के लिए, इससे पहले यह 1 लाख रुपये था)।
- खाताधारकों के लिए 10,000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा उपलब्ध है।
- यह खाता विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं जैसे प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना और 'मुद्रा' योजना के साथ जोड़ने का काम करता है।
खाते किसी भी बैंक शाखा में या बैंकिंग प्रतिनिधि के माध्यम से खोले जा सकते हैं, जिससे यह पहले से बैंकिंग सुविधा न होने पर सभी के लिए आसान हो जाता है।
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा जून 2020 में शुरू की गई प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना, कोविड-19 महामारी से प्रभावित रेहड़ी-पटरी वालों, विशेष रूप से महिलाओं को बिना किसी गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण प्रदान करती है।
- यह 15,000 रुपये (पहली किस्त) तक का शुरुआती ऋण प्रदान करती है, जिसके बाद अगली किस्तें 25,000 और 50,000 रुपये तक होती हैं। इसके

- साथ ही समय पर पुनर्भुगतान करने पर 7 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, डिजिटल कैशबैक प्रोत्साहन और पात्र विक्रेताओं के लिए युपीआई-लिंक्ड 'रुपे' क्रेडिट कार्ड की सुविधा मिलती है।
- हाल ही में मार्च 2030 तक विस्तारित ऋण अवधि और 7,332 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ पुनर्गठित की गई इस योजना का लक्ष्य 1.15 करोड़ रेहड़ी-पटरी वालों को लाभ पहुँचाना है, जिसमें 50 लाख नए विक्रेता शामिल हैं।
- दिसंबर 2025 तक, 1.46 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिसने वित्तीय समावेशन और औपचारिक पहचान के माध्यम से शहरी रेहड़ी-पटरी वालों को महत्वपूर्ण रूप से सशक्त बनाया है।
स्टैंड-अप इंडिया योजना
स्टैंड-अप इंडिया योजना ने पूरे भारत में उद्यमिता की एक लहर पैदा की है, जिससे महिलाओं और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों के व्यक्तियों को अपने साहसी विचारों को फलते-फूलते व्यवसायों में बदलने के लिए सशक्त बनाया गया है। भारत सरकार द्वारा शुरू की गई यह पहल मेनुफेक्चरिंग, सेवा, व्यापार या कृषि-संबद्ध गतिविधियों में उद्यम शुरू करने के लिए बैंक ऋण प्राप्त करना आसान बनाती है। समर्पित वित्तीय सहायता प्रदान करके और ऋण के द्वार खोलकर, स्टैंड-अप इंडिया केवल स्टार्टअप्स को वित्तपोषित नहीं कर रहा है, बल्कि यह सपनों को ऊर्जा दे रहा है, रोजगार पैदा कर रहा है, आर्थिक स्वतंत्रता का निर्माण कर रहा है और जमीनी स्तर से समावेशी विकास को गति दे रहा है।
- महिलाएं 10 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक के ऋण प्राप्त कर सकती हैं, जिसे चुकाने के लिए 7 वर्ष तक (ऋण स्थगन की अवधि सहित) का समय मिलता है। इससे स्वतंत्र रूप से व्यवसाय शुरू करना या उसे बढ़ाना आसान हो जाता है।
- प्रत्येक बैंक शाखा में कम से कम एक ऋण स्लॉट महिला के लिए आरक्षित होता है।
- स्टैंड-अप इंडिया पोर्टल के माध्यम से, महिलाओं को आवेदन पर मार्गदर्शन, प्रशिक्षण से जुड़ाव और परामर्श प्राप्त होता है। यह उन्हें 'नौकरी खोजने वाले' के बजाय 'नौकरी देने वाला' बनने, वित्तीय स्वतंत्रता प्राप्त करने और उद्यमिता में लैंगिक अंतर को कम करने में मदद करता है।
निष्कर्ष: सभी के लिए आगे की राह
भारत में महिला-नेतृत्व के विकास की कहानी अब बचत से उद्यम तक, खेतों से बाजारों तक, और लाभार्थियों से नेतृत्वकर्ताओं तक पहुँच गई है। सुकन्या समृद्धि योजना, नमो ड्रोन दीदी, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और 'वुमनिया' पहल जैसी योजनाओं ने सामूहिक रूप से महिलाओं के लिए आर्थिक परिदृश्य को बदल दिया है। इन पहलों ने उन्हें गरिमा और आसानी से ऋण प्राप्त करने, प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल, कौशल और बाजारों तक पहुँचने में सक्षम बनाया है।
आज लाखों महिलाएँ न केवल कमा रही हैं, बल्कि वे खेतों, उद्यमों और अपने स्वयं के भविष्य की मालिक भी हैं। वे ड्रोन उड़ा रही हैं, सरकारी मंत्रालयों को उत्पादों की आपूर्ति कर रही हैं, सामुदायिक संस्थानों का नेतृत्व कर रही हैं और मजबूती के साथ समृद्धि की ओर बढ़ रही हैं।
'विकसित भारत' इसी नींव पर टिका है—जहाँ प्रत्येक महिला अपनी समृद्धि की सूत्रधार है और जहाँ उसकी सफलता न तो कोई अपवाद है और न ही केवल एक आकांक्षा, बल्कि एक अपेक्षा है।
महिलाओं के लिए वित्तीय स्वतंत्रता को बढ़ाना, वास्तव में भारत के भविष्य को संवारना है।
संदर्भ:
पत्र सूचना कार्यालय
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2149728https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2227542®=1&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2214504®=3&lang=2
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https://www.pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1703147®=3&lang=2
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https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2069170®=3&lang=2
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2206995®=3&lang=1
ग्रामीण विकास मंत्रालय:
https://lakhpatididi.gov.in/bn/how-do-i-become-a-lakhpati-didi/
https://lakhpatididi.gov.in/about-lakhpati-didi/
वित्त मंत्रालय
https://www.myscheme.gov.in/schemes/sui
https://www.standupmitra.in/Home/SUISchemes
https://www.pmjdy.gov.in/account
https://www.mudra.org.in/
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