Social Welfare
खेलो इंडिया जनजातीय खेल
जनजातीय खेलों में एक नया अध्याय
Posted On:
27 MAR 2026 11:24AM
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मुख्य बातें
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पहला खेलो इंडिया जनजातीय खेल 25 मार्च से 3 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जो जनजातीय एथलीटों के लिए भारत का पहला राष्ट्रीय बहु-खेल आयोजन है।
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छत्तीसगढ़ के रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा में आयोजित हो रहे इस खेल ने भारत भर के जनजातीय एथलीटों को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया है।
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खेल में सात पदक स्पर्धाओं के साथ-साथ स्थानीय खेल परंपराओं के प्रदर्शन आयोजन भी शामिल हैं।
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30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 60,000 से अधिक एथलीट खेलों में 338 पदकों के लिए स्पर्धा करेंगे।
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भारत के खेल इकोसिस्टम का विस्तार: खेलो इंडिया दृष्टिकोण

खेल व्यक्तियों और समुदायों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये अनुशासन, आत्मविश्वास और टीमवर्क का निर्माण करते हैं, साथ ही एकता और साझा उद्देश्य की भावना को बढ़ावा देते हैं। भारत जैसे देश के लिए, खेल केवल प्रतिस्पर्धा नहीं हैं। यह युवाओं को जोड़ने, स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने तथा विकास और अवसर के मार्ग बनाने का भी एक साधन है।
इस विज़न के साथ, भारत सरकार ने देश भर में खेल संस्कृति को मजबूत करने के लिए खेलो इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की। यह कार्यक्रम जमीनी स्तर पर भागीदारी बढ़ाने, होनहार खिलाड़ियों की पहचान करने और युवा खिलाड़ियों को सतत समर्थन प्रदान करने पर केंद्रित है। प्रतियोगिता, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के संयोजन के माध्यम से, खेलो इंडिया एक अधिक संरचित और सुलभ खेल इकोसिस्टम बनाने में मदद कर रहा है।

इस दृष्टिकोण की एक प्रमुख विशेषता इसका समावेश पर जोर है। यह कार्यक्रम उन क्षेत्रों और समुदायों तक पहुँचने का प्रयास करता है, जहाँ पारंपरिक रूप से खेलों के अवसर सीमित रहे हैं तथा सुनिश्चित करता है कि पूरे देश में प्रतिभा की पहचान की जा सके और उन्हें पोषित किया जा सके। इस संदर्भ में, जनजातीय समुदायों में खेलों को बढ़ावा देने की पहल, समावेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। खेलो इंडिया के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताएँ जैसे युवा खेल, विश्वविद्यालय खेल, बीच गेम्स और विंटर गेम्स, आदि आयोजित की जाती हैं। खेलो इंडिया जनजातीय खेल को इस समूह के अंतर्गत एक और स्तंभ के रूप में जोड़ने से जनजातीय खिलाड़ियों को राष्ट्रीय मंच मिलता है, जबकि भारत की समृद्ध पारंपरिक खेल परंपरा को भी मान्यता और बढ़ावा मिलता है।
खेलो इंडिया जनजातीय खेल

लंबे समय से भारत के जनजातीय समुदायों में असाधारण खेल प्रतिभा मौजूद रही है - मजबूत, कुशल और शारीरिक परंपराओं में गहराई से जुड़े। इस प्रतिभा का बड़ा हिस्सा अब तक संरचना युक्त खेल प्लेटफार्मों के बाहर रहा है। खेलो इंडिया जनजातीय खेल इन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राष्ट्रीय मंच पर लाने का प्रयास करते हैं।

पहला खेलो इंडिया जनजातीय खेल (केआईटीजी) 25 मार्च से 3 अप्रैल 2026 तक छत्तीसगढ़ के तीन मेज़बान शहरों—रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा—में आयोजित किया जा रहा है। यह खेलो इंडिया कार्यक्रम के तहत पहला राष्ट्रीय बहु-खेल कार्यक्रम है, जो विशेष रूप से जनजातीय खिलाड़ियों के लिए समर्पित है और जिसमें 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से प्रतिभागियों को एक सामान्य प्रतिस्पर्धी मंच पर लाया जा रहा है।
आयोजन में सात पदक वाले खेल हैं - एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, भारोत्तोलन, तीरंदाजी, तैराकी और कुश्ती - साथ ही मल्लखंब और कबड्डी जैसे प्रदर्शन कार्यक्रम भी आयोजित किये जा रहे हैं, जो प्रतिस्पर्धी खेल और भारत की स्वदेशी खेल परंपरा, दोनों को दर्शाते हैं।
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कबड्डी: वैश्विक पहचान वाला एक पारंपरिक खेल
 
 
कबड्डी भारत के सबसे पुराने स्थानीय खेलों में से एक है, जिसका इतिहास भारतीय उपमहाद्वीप में निहित है जहाँ इसे पारंपरिक रूप से ताकत, रणनीति और सहनशक्ति की परीक्षा के रूप में खेला जाता था। समय के साथ, यह खेल स्थानीय मनोरंजन से एक संरचित खेल में बदल गया, जिसमें औपचारिक नियमों को 20वीं सदी के प्रारंभ में मानक रूप दिया गया और इसके बाद शीघ्र ही व्यवस्थित प्रतियोगिताओं की शुरुआत हुई।
यह खेल अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त करने में तब सफल हुआ, जब इसे 1936 के बर्लिन ओलंपिक में एक प्रदर्शन कार्यक्रम के रूप में दिखाया गया, जो वैश्विक मंच पर इसके प्रारंभिक प्रदर्शनों में से एक था। इसने भारत से बाहर के दर्शकों को कबड्डी से परिचित कराने में मदद की।
आज, कबड्डी ने पारंपरिक मूलों को व्यवस्थित प्रतिस्पर्धा के साथ संयोजित करते हुए एक विशिष्ट जगह बनाना जारी रखा है और भारत की स्वदेशी खेल विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधि बना हुआ है।
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मल्लखंब: शक्ति, संतुलन और परंपरा
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मल्लखम्ब एक पारंपरिक भारतीय खेल है जो जिमनास्टिक, योग और शक्ति प्रशिक्षण के तत्वों को मिलाता है, जिसे सीधी लकड़ी की खंभे, रस्सी या लटकते उपकरण पर प्रदर्शित किया जाता है। इसका नाम 'मल्ल' (पहलवान) और 'खंभ' (खंभा) से आया है, जो पहलवानों के लिए प्रशिक्षण अभ्यास के रूप में इसकी उत्पत्ति को दर्शाता है।
 
इसकी उत्पत्ति कई सदियों पुरानी है, यह खेल ऐतिहासिक रूप से चुस्ती, ताकत और समन्वय विकसित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। समय के साथ, यह एक संरचित स्पर्धा के रूप में विकसित हुआ जिसमें विभिन्न प्रारूप शामिल हैं, जैसे खम्भा, रस्सी और लटकते मलखंब, जिनमें से प्रत्येक के लिए उच्च स्तर के संतुलन और नियंत्रण की आवश्यकता होती है।
मल्लखम्ब ने अंतरराष्ट्रीय पहचान तब मिली, जब इसे 1936 के बर्लिन ओलंपिक में प्रदर्शन कार्यक्रम के रूप में प्रदर्शित किया गया और इस प्रकार इस स्थानीय खेल को दुनिया के दर्शकों के सामने पेश किया गया।
परंपरा और खेल-कौशल का मिश्रण, मल्लखम्ब आज भारत की समृद्ध शारीरिक संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे खेलो इंडिया जनजातीय खेल जैसे मंचों में जगह मिली है। खेलो इंडिया जनजातीय खेल मुख्यधारा के खेलों के साथ स्थानीय खेलों को भी बढ़ावा देते हैं।
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यह पहल सिर्फ खेल-स्थल तक ही सीमित नहीं है। संगठित खेल को उन क्षेत्रों में ले जाकर जहाँ पहुंच अक्सर सीमित रही है, ये खेल युवा लोगों के लिए नए अवसर खोलते हैं, जो अनुभव, आत्मविश्वास या भविष्य के अवसरों के रूप में हो सकते हैं। इस अर्थ में, खेल केवल प्रतिस्पर्धा से अधिक हो जाता है; यह जुड़ने, बढ़ने और आगे जाने का एक तरीका बन जाता है।
आधिकारिक शुभंकर, मोरवीर, खेलों की भावना को प्रतिबिंबित करता है। यह छत्तीसगढ़ी शब्दों - 'मोर' (हमारा) और 'वीर' (बहादुरी) से लिया गया है, और यह भारत के जनजातीय समुदायों के गर्व, भावना और पहचान का प्रतीक है।
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई), भारतीय ओलंपिक संघ, राष्ट्रीय खेल महासंघों और छत्तीसगढ़ राज्य आयोजन समिति द्वारा खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 का संयुक्त रूप से प्रबंधन किया जा रहा है, जिसमें तकनीकी मानकों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अनुरूप निर्धारित किया गया है।
खेलो इंडिया जनजातीय खेल के आयोजन केवल प्रतिभा की ही नहीं, बल्कि इसके पीछे की कई कहानियों को भी सामने लाते हैं—प्रयास, आकांक्षा और देखे जाने का मौका।
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छत्तीसगढ़: एक नए युग का प्रारंभ
यह महत्वपूर्ण है कि छत्तीसगढ़, जो दशकों से वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहा है, खेलो इंडिया जनजातीय खेल 2026 की मेजबानी कर रहा है। यह क्षेत्र के लोगों की सहनशील भावना को दर्शाता है। केआईटीजी बस्तर, सरगुजा और दंड़कारण्य जैसे आदिवासी-बहुल क्षेत्रों में व्यवस्थित खेल के अवसर लाएगा, जहां प्रतिभाओं को ऐतिहासिक रूप से कम पहचान मिलती रही है। राज्य सरकार ने पिछले साल बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया था, जिसके बाद 2026 में सरगुजा ओलंपिक का आयोजन किया गया, जिससे यह बात सामने आयी कि समुदाय स्तर की भागीदारी स्थानीय प्रतिभा को कैसे उजागर कर सकती है। खेलो इंडिया जनजातीय खेल का उद्देश्य भागीदारी का विस्तार करना और समुदाय स्तर पर प्रतिभा की पहचान करना है। इनमें से कई क्षेत्रों ने समय के साथ सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का भी सामना किया है। इस बात को ध्यान में रखते हुए, इस खेल का लक्ष्य जनजातीय खिलाड़ियों को राष्ट्रीय खेल इकोसिस्टम में शामिल करना और भारत के भविष्य के प्रतिभा समूह को मजबूत करना है।
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भागीदारी, पदक और चयन रूपरेखा
खेलो इंडिया जनजातीय खेल 2026 में राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक भागीदारी देखी जा रही है। इन खेलों में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 60,000 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। यह व्यापक भागीदारी देश भर के जनजातीय समुदायों में व्यवस्थित खेल स्पर्धा की बढ़ती पहुंच को प्रतिबिंबित करती है।
सात खेल विधाओं में कुल 338 पदकों के लिए प्रतिस्पर्धा हो रही है, जिनमें 106 स्वर्ण, 106 रजत और 126 कांस्य पदक शामिल हैं। एथलेटिक्स में सबसे अधिक पदक हैं, इसके बाद तैराकी, कुश्ती और भारोत्तोलन हैं, जो विभिन्न विधाओं में प्रतिस्पर्धा के पैमाने और विविधता को दर्शाते हैं।
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क्रमांक
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खेल
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पदक
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कुल
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स्वर्ण
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रजत
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कांस्य
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-
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तीरंदाजी
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10
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10
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10
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30
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-
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एथलेटिक्स
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34
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34
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34
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102
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-
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फ़ुटबॉल
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2
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2
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4
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8
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-
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हॉकी
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2
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2
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2
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6
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-
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तैराकी
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24
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24
|
24
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72
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-
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भारोत्तोलन
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16
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16
|
16
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48
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-
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कुश्ती
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18
|
18
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36
|
72
|
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कुल
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106
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106
|
126
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338
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खेलों के लिए खिलाड़ियों का चयन दो चरणों की प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है:
चरण 1: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने संबंधित खेल विभागों के माध्यम से चयन परीक्षण आयोजित किए ताकि योग्य जनजातीय खिलाड़ियों की पहचान की जा सके और उन्हें अगले चरण के लिए नामांकित किया जा सके।
चरण 2: चयनित खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय खेल महासंघों द्वारा आयोजित राष्ट्रीय चयन परीक्षणों में भाग लिया, जो खेलो इंडिया टीम के समन्वय से आयोजित किये गये थे। इन परीक्षणों में प्रदर्शन के आधार पर अंतिम चयन किया गया, जिससे भागीदारी के लिए एक पारदर्शी और योग्यता-आधारित तरीका सुनिश्चित हुआ।
इसके अलावा, खेल, प्रतिभा पहचान के लिए एक मंच के रूप में काम करते हैं, जिसमें एक समर्पित प्रतिभा पहचान और विकास समिति (टीआईडीसी) तैनात की जाती है, ताकि खेलो इंडिया रूपरेखा के तहत आगे प्रशिक्षण और विकास के लिए होनहार खिलाड़ियों की खोज की जा सके।
प्रतिस्पर्धा कार्यक्रम और आयोजन प्रवाह
खेलो इंडिया जनजातीय खेल 2026 दस दिन की अवधि में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रतियोगिताओं का सुचारू और कुशल संचालन सुनिश्चित करने के लिए कई स्थलों पर आयोजन निर्धारित किये गये हैं। कार्यक्रम को विभिन्न विधाओं में समानांतर आयोजनों को समायोजित करने के लिए तैयार किया गया है, ताकि खिलाड़ियों को भाग लेने और प्रगति के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

25 मार्च से 3 अप्रैल तक की आयोजन अवधि के लिए कार्यक्रम को इस तरह से तैयार किया गया है कि गति बनी रहे और हर दिन नए मुकाबले, नई कहानियाँ और नए चैंपियन सामने आएँ। इसका उद्देश्य स्पर्धाओं से कहीं अधिक है और यह इसे एक साझा अनुभव बनाना चाहता है, जो खिलाड़ियों, समुदायों और दर्शकों को एक साथ जोड़ता हो।
खेलो इंडिया जनजातीय खेल 2026 दूरदर्शन पर लाइव प्रसारित किए जा रहे हैं, जिससे पूरे देश के लोग इन पलों को देख सकें और जनजातीय युवाओं की भावना और प्रतिभा का जश्न मना सकें।
खेलों की झलकियाँ

एक सिद्ध प्रक्रिया: खेलो इंडिया के तहत अवसंरचना और प्रतिभा विकास
पहुँच का विस्तार: खेलो इंडिया के तहत खेल अवसंरचना
देश भर में, सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को शामिल करते हुए, खेलो इंडिया कार्यक्रम ने खेल अवसंरचना का महत्वपूर्ण रूप से विस्तार किया है, अब तक कुल 344 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इन परियोजनाओं की कुल वित्तीय लागत 3,158.15 करोड़ रुपये है, जिसे मंजूरी दी जा चुकी है, जिसमें से 2,730.95 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं, जो कार्यान्वयन की निरंतर प्रगति को प्रतिबिंबित करता है।

अवसंरचना के निर्माण की दृष्टि से, यह कार्यक्रम सुविधाओं की एक व्यापक श्रृंखला को शामिल करता है:
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126 बहुउद्देश्यीय हॉल
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64 एथलेटिक ट्रैक
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25 फुटबॉल मैदान
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29 हॉकी मैदान
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16 तरण ताल
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84 अन्य खेल सुविधाएँ
अवसंरचना का यह बढ़ता नेटवर्क, पारंपरिक केंद्रों के बाहर गुणवत्ता युक्त खेल सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाने में मदद कर रहा है, जिससे संगठित खेलों को समुदायों के करीब लाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ और अन्य जनजातीय क्षेत्रों में, ये निवेश उस आधार का निर्माण करते हैं जिस पर खेलो इंडिया जनजातीय खेल जैसी पहल का आयोजन किया जा सकता है— जिससे अवसंरचना को भागीदारी और दीर्घकालिक प्रतिभा विकास से जोड़ा जा सकता है।
प्रतिभा से उपलब्धि तक: खेलो इंडिया के तहत खिलाड़ी
खेलो इंडिया कार्यक्रम प्राथमिक स्तर पर प्रतिभा की पहचान कर रहा है और खिलाड़ियों को विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा करने और उच्च स्तर पर सफलता प्राप्त करने के लिए समर्थन दे रहा है। खेलो इंडिया केंद्रों (केआईसी) से उभरने वाली उपलब्धियाँ देश में प्रतिभा की विविधता और गहराई दोनों को प्रतिबिंबित करती हैं।

एथलेटिक्स में, गुनगुन (उत्तर प्रदेश) ने 100 मी (अंडर-20) में स्वर्ण जीता, जबकि संगीता (उत्तर प्रदेश) ने राज्य भारोत्तोलन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। टीम खेलों में, खुशी कुमारी (बिहार) ने राष्ट्रीय रग्बी सब-जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर गैर-पारंपरिक खेल क्षेत्रों से प्रतिभा के उदय को रेखांकित किया।
जम्मू और कश्मीर से, ट्रिज़ा बलाल के नेतृत्व में जिमनास्टों ने राष्ट्रीय सब-जूनियर रिदमिक जिमनास्टिक चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया तथा व्यक्तिगत और टीम स्पर्धा में कई पदक हासिल किए। कबड्डी में, शाहिद जफर और नाज़िया तलीफ (जम्मू और कश्मीर) जैसे खिलाड़ियों को सब-जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए चुना गया, जो दूरदराज क्षेत्रों से बढ़ते प्रतिनिधित्व को प्रतिबिंबित करता है।
केरल में, अहानफ पीके (मुक्केबाज़ी) और हरिनंदन पीए (तैराकी) जैसे एथलीटों ने राज्य स्तर के स्वर्ण पदक प्राप्त किया और राष्ट्रीय भागीदारी सुनिश्चित की, जबकि पंजाब की ब्रमजोत कौर जैसी एथलीटों ने एथलेटिक्स स्पर्धाओं में पोडियम स्थान प्राप्त किए।
विभिन्न खेलों में—एथलेटिक्स और मुक्केबाज़ी से लेकर कबड्डी, जिम्नास्टिक्स और रग्बी तक—ये उपलब्धियां एक स्पष्ट बदलाव को प्रतिबिंबित करती हैं। छोटे शहरों और कम सुविधा वाले क्षेत्रों के खिलाड़ी अब स्थानीय मंचों से राष्ट्रीय प्रतियोगिता की ओर बढ़ रहे हैं।
इस संदर्भ में, खेलो इंडिया जनजातीय खेल इन प्रक्रियाओं पर आगे बढ़ता है और एक विशिष्ट मंच तैयार करता है, ताकि जनजातीय समुदायों से प्रतिभा की पहचान की जा सके, उन्हें समर्थन दिया जा सके और व्यापक खेल इकोसिस्टम से जोड़ा जा सके।
गति को आगे बढ़ाना
जनजातीय समुदायों के लिए समर्पित पहली राष्ट्रीय बहु-खेल प्रतियोगिता के रूप में, ये खेल विजेताओं को सम्मानित करने के अलावा एक महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। ये खिलाड़ियों को भागीदारी, आत्मविश्वास और संपर्क की सुविधा देते हैं, जिससे युवा खिलाड़ी ऐसे वातावरण में कदम रख सकते हैं जहाँ उनकी क्षमताओं को पहचान और अहमियत मिलती है।
इसके बाद जो होता है, वह भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। खेल, उभरती प्रतिभा की पहचान करने और उन्हें समर्थन देने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। प्रशिक्षक, तकनीकी विशेषज्ञ और प्रतिभाओं की मौजूदगी में, होनहार खिलाड़ी संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रवेश कर सकते हैं, जिसमें भारतीय खेल प्राधिकरण के केंद्रों में अवसर शामिल हैं। कई के लिए, यह एक लंबी यात्रा की शुरुआत हो सकती है।
जैसे-जैसे यह प्रक्रिया मजबूत होगी, खेलो इंडिया जनजातीय खेल का प्रभाव केवल पदकों में ही नहीं बल्कि उन अवसरों में भी देखा जाएगा, जिन्हें ये खेल पैदा करते हैं। कभी व्यवस्थित खेलों तक सीमित पहुँच रखने वाले मैदानों में, अब नई कहानियाँ आकार लेने लगी हैं – भागीदारी से आत्मविश्वास बढ़ रहा है और आत्मविश्वास सफलता के बड़े अवसरों को सामने ला रहा है।
संदर्भ
पत्र सूचना कार्यालय
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय
अन्य
खेलो इंडिया जनजातीय खेल
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पीआईबी अनुसंधान
पीके/केसी/जेएम
(Explainer ID: 157959)
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