Technology
भारत की समुद्री सीमाओं के रक्षक
युद्ध, सर्वेक्षण एवं तटीय सुरक्षा हेतु तीन स्वदेशी नौसैनिक पोत श्रेणियाँ
Posted On:
13 JUL 2026 11:10AM
|
भारत की समुद्री शक्ति एक संतुलित बेड़े पर आधारित है, जो नौसैनिक अभियानों के सभी पहलुओं में राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। नीलगिरी, संधायक और अर्नाला श्रेणी के युद्धपोत इस क्षमता के तीन महत्वपूर्ण स्तंभों का प्रतिनिधित्व करते हैं। हाल ही में सेवा में शामिल किए गए आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय इन स्वदेशी युद्धपोत श्रेणियों के निरंतर विस्तार को दर्शाते हैं। आईएनएस महेंद्रगिरि इस क्षमता को और मजबूत करता है। उच्च स्वदेशीकरण के साथ निर्मित ये पोत 'आत्मनिर्भर भारत' की भावना को साकार करते हुए भारत के रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती प्रदान करते हैं। सामूहिक रूप से ये भारत की समुद्री सुरक्षा को सशक्त बनाते हैं, ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देते हैं तथा एक अग्रणी समुद्री शक्ति के रूप में भारत की स्थिति को और मजबूत करते हैं।
|
भारत की स्तरीय नौसेना क्षमता
भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा की प्रमुख प्रदाता है। यह लगभग 11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा, करीब 24 लाख वर्ग किलोमीटर के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईज़ेड) तथा भारत के कुल व्यापार (मात्रा के आधार पर) का लगभग 90 प्रतिशत वहन करने वाले समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। इस दायित्व के निर्वहन के लिए संतुलित नौसैनिक बेड़े की आवश्यकता होती है, जिसमें प्रत्येक श्रेणी का युद्धपोत समुद्री सुरक्षा की एक विशिष्ट परत को सुदृढ़ करता है। भारत में मात्र एक महीने के भीतर शामिल किए गए नई पीढ़ी के चार स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म इस बहुस्तरीय समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को साकार रूप देते हैं।
समुद्र की सतह पर रोकने और लड़ने की क्षमता इस संरचना के केंद्र में है। इस सेगमेंट में नवीनतम नीलगिरि-श्रेणी के स्टील्थ फ्रिगेट हैं जो उच्च तीव्रता वाले संचालन के लिए प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए गए हैं। उनकी कम रडार, तापीय (थर्मल) और ध्वनिक (अकॉस्टिक) पहचान क्षमता उन्हें युद्ध की परिस्थितियों में अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाती है।
समुद्री शक्ति का आधार महासागरों की गहन समझ भी है। संधायक श्रेणी के सर्वे वेसल (लार्ज) भारत की हाइड्रोग्राफिक क्षमता को सुदृढ़ करते हैं। ये समुद्र तल का मानचित्रण करते हैं, समुद्री आँकड़े एकत्रित करते हैं तथा सुरक्षित नौवहन के लिए सटीक नौवहन चार्ट तैयार करते हैं। यह कार्य नौसैनिक अभियानों, समुद्री व्यापार और ब्लू इकोनॉमी को समर्थन देता है तथा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत को एक विश्वसनीय हाइड्रोग्राफिक साझेदार के रूप में स्थापित करता है।
तटीय क्षेत्रों के निकट, पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमता रक्षा की अगली परत बनाती है। अर्नाला श्रेणी के एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट उथले तटीय जलक्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए हैं। अपनी प्रमुख भूमिका के अलावा, ये तीनों श्रेणियाँ मानवीय सहायता, आपदा राहत तथा खोज एवं बचाव अभियानों का भी सफलतापूर्वक संचालन कर सकती हैं।
ये तीनों श्रेणियाँ मिलकर भारत के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रमों की सफलता का प्रतीक हैं। इनका क्रमिक उत्पादन (सीरियल प्रोडक्शन) समुद्री सुरक्षा को और सुदृढ़ करता है, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाता है तथा यह दर्शाता है कि भारत अब अपने आधुनिक युद्धपोतों का स्वदेशी डिज़ाइन और निर्माण करने में निरंतर सक्षम होता जा रहा है।
|
क्या आप जानते हैं?
तीन स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित इन युद्धपोतों को 21 जून 2026 को कोलकाता में एक साथ नौसेना में शामिल किया गया। ये जहाज हैं- नीलगिरी-श्रेणी का स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस दुनागिरी, संधायक-श्रेणी का सर्वेक्षण पोत (बड़ा) आईएनएस संशोधक और अर्नाला-श्रेणी की पनडुब्बी रोधी जहाज आईएनएस अग्रेय। इन तीनों जहाजों को नौसेना के अपने युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई), कोलकाता द्वारा निर्मित किया गया है जो सार्वजनिक रक्षा क्षेत्र का एक उपक्रम है।
11 जुलाई 2026 को, छठे स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित नीलगिरि श्रेणी के स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस महेंद्रगिरि को विशाखापत्तनम में सेवा में शामिल किया गया।
|
स्टील्थ फ्रिगेट्स: सतह की शक्ति का अत्याधुनिक आयाम
स्टील्थ फ्रिगेट भारतीय नौसेना की सतह युद्ध क्षमता की रीढ़ हैं। वे विमान वाहक युद्धपोतों की रक्षा करते हैं, महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को सुरक्षित करते हैं और समुद्र में शक्ति केंद्र के रूप में खुद को स्थापित करते हैं। आधुनिक नौसैनिक युद्ध के लिए तैयार ये प्रणालियां उन्नत हथियारों, सेंसर और विमानन सुविधाओं का समावेश करती हैं और रडार, इन्फ्रारेड (थर्मल) तथा उन्नत स्टील्थ के लिए ध्वनिक हस्ताक्षरों को अनुकूलित करती हैं। इससे उनकी पहचान करना कठिन हो जाता है, जिससे आक्रामक और रक्षात्मक अभियानों का संचालन प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
इस क्षमता के आधार पर प्रोजेक्ट 17ए, स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट की नवीनतम पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है। नीलगिरि श्रेणी में आईएनएस नीलगिरी, आईएनएस हिमगिरी, आईएनएस तारागिरी, आईएनएस उदयगिरी, आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस महेंद्रगिरि और निर्माणाधीन विंध्यगिरि शामिल हैं। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई ने चार जहाजों का निर्माण किया है, जबकि गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड, कोलकाता तीन का निर्माण कर रहा है। इस श्रेणी में आईएनएस दुनागिरी को हाल ही में अपने पांचवें जहाज के रूप में कमीशन किया गया था और इस श्रेणी के पोत आईएनएस महेंद्रगिरि को 11 जुलाई 2026 को विशाखापत्तनम में कमीशन किया गया था। ये युद्धपोत भारत की समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करते हैं और हिंद महासागर में अपनी सशक्त उपस्थिति को दर्शाते हैं।
|
क्या आप जानते हैं?
प्रोजेक्ट 17ए, भारतीय नौसेना का उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट कार्यक्रम है जो अगली पीढ़ी के सात गाइडेड-मिसाइल युद्धपोतों का निर्माण करता है। इन फ्रिगेट को बहु-मिशन संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें एंटी-एयर, एंटी-सरफेस और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शामिल हैं। प्रोजेक्ट 17ए, युद्धपोत डिजाइन और निर्माण के मामले में भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
|
प्रोजेक्ट 17ए नीलगिरी-क्लास स्टील्थ फ्रिगेट्स की मुख्य विशेषताएं
- आकार: लगभग 149 मीटर लंबा और वजन लगभग 6,670 टन।
- प्रणोदन: संयुक्त डीजल या गैस प्रणाली, जो डीजल इंजनों को रेंज और गति के लिए गैस टर्बाइनों के साथ जोड़ती है।
- गति: 28 समुद्री मील की अधिकतम गति। एक समुद्री मील लगभग 1.85 किलोमीटर प्रति घंटा है।
- स्ट्राइक पावर: सतह से सतह पर मार करने वाली सुपरसोनिक मिसाइलें जो दूर के जहाजों और समुद्री किनारे के लक्ष्यों पर प्रहार करती हैं।
- हवाई सुरक्षा: इन फ्रिगेट में ब्रह्मोस मिसाइल, मध्यम दूरी की हवाई-रक्षा मिसाइलें और क्लोज-इन गन सहित उन्नत हथियार हैं जो विमान और मिसाइलों को रोकते हैं।[2]
- सेंसर और एयर विंग: उन्नत रडार, एक पतवार-माउंटेड सोनार और हेलीकॉप्टर का उपयोग किया जाता है। सोनार ध्वनि तरंगों के माध्यम से पानी के भीतर पनडुब्बियों का पता लगाता है।
|
क्या आप जानते हैं?
प्रोजेक्ट 17ए फ्रिगेट के अलावा, भारतीय नौसेना के पास स्टील्थ जहाजों के दो और श्रेणी भी हैं, जिनके नाम हैं: तलवार क्लास और शिवालिक-क्लास। तलवार श्रेणी (प्रोजेक्ट 1135.6/11356) के युद्धपोत रूस में डिजाइन और निर्मित किए गए थे। यह वह दौर था, जब नौसेना अपनी अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत विदेशों से खरीदती थी। यह शिवालिक क्लास (प्रोजेक्ट 17) के साथ बदल गया, जो भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया स्टील्थ फ्रिगेट है। इसे नौसेना के अपने युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया था और मझगांव डॉक, मुंबई में बनाया गया था। प्रोजेक्ट 17ए (नीलगिरि क्लास) इस विरासत को बेहतर सेंसर, हथियारों और बहुत अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ आगे ले जाता है, जो आत्मनिर्भर भारत विजन के तहत नौसेना को क्रेता से निर्माता के रूप में बदलाव को दर्शाता है।
|
|
स्टील्थ तकनीक वास्तव में कैसे काम करता है?
स्टेल्थ प्रौद्योगिकी किसी युद्धपोत को दुश्मन के लिए पहचानना अधिक कठिन बना देती है। यह युद्धपोत को अदृश्य नहीं बनाती, बल्कि उसे उसकी वास्तविक आकार और उपस्थिति की तुलना में रडार पर कहीं छोटा और कम पहचान योग्य दिखाती है। इसके लिए युद्धपोतों में कई तकनीकों का उपयोग किया जाता है। उनकी ढलानदार (एंगल्ड) बाहरी संरचना दुश्मन की रडार तरंगों को दूसरी दिशा में मोड़ देती है, जबकि विशेष रडार-अवशोषी (रडार एब्ज़ॉर्बेंट) परतें रडार संकेतों को परावर्तित करने के बजाय उन्हें अवशोषित कर लेती हैं।
|

सर्वेक्षण पोत: सुरक्षा और समृद्धि के लिए समुद्री गतिविधि
सर्वेक्षण पोत समुद्र तल और तटीय जल का मानचित्रण करके भारतीय नौसेना की हाइड्रोग्राफिक क्षमता को मजबूत करते हैं। सटीक समुद्री चार्ट युद्धपोतों और वाणिज्यिक जहाजों के लिए सुरक्षित नेविगेशन सुनिश्चित करते हैं। वे समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग के माध्यम से समुद्री अर्थव्यवस्था को भी आधार प्रदान करते हैं। ये जहाज नियमित रूप से मानवीय सहायता, आपदा राहत और खोज एवं बचाव मिशन चलाते हैं.

इस महत्वपूर्ण क्षमता को बनाए रखने के लिए, भारतीय नौसेना स्वदेशी संधायक-श्रेणी के सर्वेक्षण पोतों को शामिल कर रही है। इस वर्ग में आईएनएस संधायक, आईएनएस निर्देशक, आईएनएस ईक्षक और आईएनएस संशोधक शामिल हैं।
कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड द्वारा निर्मित आईएनएस संशोधक को हाल ही में इस श्रेणी के चौथे और अंतिम जहाज के रूप में सेवा में शामिल किया गया था। ये पोत भारत के समुद्री क्षेत्र के प्रति जागरूकता को बढ़ाते हैं और हिंद महासागर क्षेत्र में हाइड्रोग्राफिक सहयोग में इसके नेतृत्व को मजबूत करते हैं।
संधायक-श्रेणी के सर्वेक्षण जहाजों की मुख्य विशिष्टताएं
- आकार: लगभग 110 मीटर लंबा, वजन लगभग 3,400 टन।
- गति और सीमा: 18 समुद्री मील से अधिक की शीर्ष गति और 6,500 समुद्री मील की परिचालन सीमा में सक्षम यह पोत हिंद महासागर और उससे आगे लंबी दूरी के मिशन को अंजाम दे सकता है।
- चालक दल: इन जहाजों में लगभग 178 कर्मी हैं।
- सर्वेक्षण सूट: मल्टी-बीम इको साउंडर्स, साइड-स्कैन सोनार और स्वायत्त जलक्षेत्र के नीचे के वाहन जो समुद्र तल को विस्तार से मैप करते हैं।
- माध्यमिक भूमिकाएं: यह हेलीकॉप्टर संचालित कर सकता है और आपात स्थिति में अस्पताल के के रूप में काम कर सकता है।
- भारत के हाइड्रोग्राफरों ने 89,000 वर्ग किलोमीटर का सर्वेक्षण किया है और पांच वर्षों (2019-24) में 96 चार्ट तैयार किए हैं, जिससे कई मित्र देशों को सहायता मिली है।
|
क्या आप जानते हैं?
21 जून को दुनिया भर में विश्व हाइड्रोग्राफी दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत के सबसे नए सर्वेक्षण जहाज आईएनएस संशोधक को उसी दिन सेवा में शामिल किया गया था।
|
उथले जल के सबमरीन हंटर: तटीय सुरक्षा के प्रहरी
पनडुब्बी रोधी जलपोत भारतीय नौसेना की तटीय रक्षा क्षमता को और मजबूती प्रदान करते हैं। वे तट के पास उथले पानी में काम करने वाली पनडुब्बियों का पता लगाते हैं और उन्हें बेअसर करते हैं। बड़े युद्धपोत इन क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से कार्य नहीं कर सकते हैं, जिससे ये फुर्तीले जहाज आवश्यक हो जाते हैं। वे मानवीय सहायता, आपदा राहत और खोज एवं बचाव मिशनों में भी सहायक होते हैं।

समुद्री सुरक्षा की इस महत्वपूर्ण स्तर को मजबूत करने के लिए, भारतीय नौसेना स्वदेशी अर्नाला-श्रेणी के जहाजों को शामिल कर रही है। आठ जहाजों की श्रेणी में अर्नाला, अंद्रोथ, अंजदीप, अमिनी, अभय, अग्रय, अक्षय और अजय शामिल हैं। एलएंडटी शिपबिल्डिंग के साथ साझेदारी में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड द्वारा निर्मित, ये जहाज पुराने अभय-श्रेणी के कार्वेट की जगह लेते हैं। आईएनएस अग्रय को हाल ही में इस श्रेणी के चौथे जहाज के रूप में कमीशन किया गया था। कोचीन शिपयार्ड में एक समानांतर माहे-श्रेणी का पोत निर्माणाधीन है, जो नियोजित ताकत को 16 पनडुब्बी रोधी जलपोत तक बढ़ा देगा। वे भारत के तटीय जल की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे और बड़े युद्धपोतों को खुले समुद्र में संचालन पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देंगे।
अर्नाला-श्रेणी के जहाजों की मुख्य विशेषताएं
- आकार: लगभग 77.6 मीटर लंबा, वजन लगभग 900 टन है।
- प्रणोदन: वॉटरजेट जो प्रोपेलर के बजाय पानी के जेट के साथ पोत को चलाते हैं, उथले पानी में चपलता देते हैं।
- गति: लगभग 25 समुद्री मील की शीर्ष गति।
- हथियार: सतह के नीचे पनडुब्बियों पर हमला करने के लिए हल्के टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेट।
- सेंसर: उथले पानी के लिए सोनार और एक युद्ध प्रबंधन प्रणाली, जो सेंसर को हथियारों से जोड़ती है।
|
क्या आप जानते हैं?
आईएनएस अर्नाला भारतीय नौसेना द्वारा शामिल किया गया अब तक का सबसे बड़ा वाटरजेट-चालित युद्धपोत है।
|
युद्ध से परे रणनीतिक महत्व
नीलगिरी, संधायक और अर्नाला श्रेणी के पोत, नौसैनिक क्षमता की अग्रिम पंक्ति से कहीं बढ़कर योगदान देते हैं। वे राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करते हैं, आत्मनिर्भरता को बढ़ाते हैं और भारत की समुद्री महत्वाकांक्षाओं को आधार प्रदान करते हैं। उनका प्रभाव रक्षा विनिर्माण, रोजगार, समुद्री कूटनीति, समुद्री अर्थव्यवस्था और रक्षा निर्यात तक फैला हुआ है। ये स्वदेशी-युद्धपोत भारत के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्यों में कैसे योगदान करते हैं, नीचे दी गई तालिका से स्पष्ट होता है-
|
लक्ष्य
|
ये जहाज कैसे कार्य करते हैं
|
|
आत्मनिर्भरता (स्वदेशीकरण)
|
सभी तीन श्रेणियों के पोतों को नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो (नीलगिरि और संधायक श्रेणी) और भारतीय शिपयार्ड (अर्नाला और माहे श्रेणी) द्वारा डिजाइन किया गया है और भारतीय यार्ड में बनाया गया है। प्रोजेक्ट 17ए फ्रिगेट के लिए स्वदेशी सामग्री 75 प्रतिशत और संधायक सर्वेक्षण पोतों के लिए 80 प्रतिशत से अधिक है। नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए 66 जहाजों और पनडुब्बियों में से 64 का निर्माण भारत में ही हो रहा है।
|
|
रोजगार सृजन
|
श्रृंखलावद्ध तरीके से इन पोतों का निर्माण, शिपयार्ड को कायम रखने के अलावा एक विस्तृत विक्रेता नेटवर्क को भी बनाए रखते हैं। प्रोजेक्ट 17ए फ्रिगेट लाइन में 200 से अधिक एमएसएमई और लगभग 4,000 प्रत्यक्ष रोजगार शामिल थे। इसने 10,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कीं और अर्नाला-श्रेणी ने जीआरएसई और एलएंडटी कट्टुपल्ली साझेदारी को जोड़ा।
|
|
समुद्री सुरक्षा (पसंदीदा सुरक्षा भागीदार)
|
इन श्रेणी के जहाज कई स्तरीय शक्ति देते हैं: समुद्री नियंत्रण के लिए फ्रिगेट, सुरक्षित मार्ग के लिए सर्वेक्षण पोत, तटवर्ती क्षेत्र के लिए पनडुब्बी रोधी पोत। क्षेत्र के पहले उत्तरदाता के रूप में, नौसेना अदन की खाड़ी जैसे चोक पॉइंट्स पर समुद्री डकैती का मुकाबला करती है। यह सभी के लिए नेविगेशन और व्यापार की स्वतंत्रता की रक्षा करता है।
|
|
समुद्री अर्थव्यवस्था
|
सर्वेक्षण श्रेणी के पोत बंदरगाहों, नौवहन मार्गों (चैनलों) और भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईज़ेड) का समुद्री मानचित्रण करते हैं। इससे मत्स्य पालन, अपतटीय ऊर्जा गतिविधियों और सुरक्षित समुद्री परिवहन को बढ़ावा मिलता है, जिसकी सुरक्षा फ्रिगेट और पनडुब्बी रोधी युद्धपोत (एएसडब्ल्यू) सुनिश्चित करते हैं। भारत की ब्लू इकोनॉमी देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 4 प्रतिशत का योगदान देती है।
|
|
युद्धपोतों का समुद्री निर्यात
|
भारत, नौसैनिक पोतों के आयातक से निर्यातक के रूप में आगे बढ़ रहा है। सर्वेक्षण और एएसडब्ल्यू वर्गों के निर्माता-जीआरएसई, विदेश से मिले ऑर्डरों को पूरा कर रहा है। राष्ट्रीय रक्षा निर्यात 2024-25 में रिकॉर्ड 23,622 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2023-24 के रक्षा निर्यात के आंकड़ों से लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। वित्त वर्ष 2023-24 में यह 21,083 करोड़ रुपए था।
|
|
सागर और महासागर विजन
|
संधायक श्रेणी के सर्वेक्षण जहाज सुरक्षित नेविगेशन के लिए महासागरों का चार्ट बनाते हैं। वे भारत के समुद्री हितों और मित्र राष्ट्रों के हितों की रक्षा करते हैं। यह सागर (2015) और महासागर (2025) के विजन को आगे बढ़ाता है, जिसके अंतर्गत युद्धपोत भागीदार देशों में तैनात किए गए हैं।
|
|
क्या आप जानते हैं?
भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र के सबसे निकट पड़ोसी देशों को सुरक्षित करने के लिए 2015 में सागर (SAGAR) (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) शुरू किया। बाद में इसने व्यापक ग्लोबल साउथ में साझेदारी बनाने के लिए 2025 में महासागर (MAHASAGAR) (क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए आपसी और समग्र प्रगति) लॉन्च करके विश्व स्तर पर अपनी पहुंच का विस्तार किया। ये दोनों सिद्धांत क्षेत्रीय सुरक्षा में सुधार, समुद्री अर्थव्यवस्था को विकसित करने और आपदाओं की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए काम करते हैं।
|
भारत के समुद्री भविष्य को सुरक्षित करना
भारत की नीलगिरि, संधायक और अर्नाला श्रेणी के युद्धपोत भारतीय नौसेना की क्षमताओं के निरंतर विकास का प्रतीक हैं। ये तीनों श्रेणियां मिलकर सतही युद्धक क्षमता, हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण तथा तटीय पनडुब्बी-रोधी युद्ध (एंटी-सबमरीन वॉरफेयर) को सुदृढ़ बनाती हैं। इनका डिजाइन भारतीय नौसेना के वारशिप डिज़ाइन ब्यूरो ने तैयार किया है और इनका निर्माण भारतीय शिपयार्डों में किया गया है। ये जटिल अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों के स्वदेशी डिजाइन और निर्माण में भारत की बढ़ती विशेषज्ञता को दर्शाते हैं। इनका बढ़ता उत्पादन रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती प्रदान करता है।
इनका योगदान केवल नौसैनिक अभियानों तक सीमित नहीं है। ये भारतीय शिपयार्डों को सशक्त बनाते हैं, सैकड़ों एमएसएमई का सहयोग करते हैं और हजारों कुशल रोजगारों का सृजन करते हैं। साथ ही, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत कर ये SAGAR और MAHASAGAR की परिकल्पना को भी आगे बढ़ाते हैं। भारत के समुद्री हितों के विस्तार के साथ, ये स्वदेशी युद्धपोत श्रेणियां राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के साथ-साथ हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को और सुदृढ़ करेंगी।
संदर्भ
प्रधानमंत्री कार्यालय
रक्षा मंत्रालय
विदेश मंत्रालय
मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
हिंदी PDF फ़ाइल के लिए यहाँ क्लिक करें
****
पीके/केसी/बीयू/एमबी
(Explainer ID: 159196)
आगंतुक पटल : 53
Provide suggestions / comments